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संतान से भी ज्यादा इंसान को प्यारी होती है ये चीज, यकीन न हो तो पढ़ लें अकबर और बीरबल की ये कहानी

किसी भी इंसान को सबसे प्यारा क्या होता है ?

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आगरा

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Dhirendra yadav

Feb 26, 2019

Akbar-birbal

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हमेशा की तरह उस दिन भी अकबर व बीरबल बातचीत करने में मशगूल थे। अचानक बादशाह ने पूछा, ‘‘बीरबल! किसी भी इंसान को सबसे प्यारा क्या होता है ?’’

बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया, ‘‘हुजूर! हर प्राणी को अपनी जान से प्यारा और कुछ नहीं होता।’’

‘‘क्या तुम इसे सिद्ध कर सकते हो ?’’ बादशाह ने पूछा।

‘‘हाँ, क्यों नहीं।’’ बीरबल का जवाब था।

कुछ दिन बाद बीरबल एक बंदर का बच्चा लेकर आया, बच्चे की माँ भी साथ थी।

महल में बगीचे के ठीक बीचो बीच एक हौद बना था। बीरबल ने नौकरों से कहा कि हौद खाली कर दें। उसने यह भी कहा कि खाली हौद के बीच में एक लंबा बाँस गाड़ दें।

इसके बाद बीरबल ने उस बंदर के बच्चे और उसकी माँ को खाली तालाब में छुड़वा दिया और नौकरों को आदेश दिया कि तालाब को फिर से पानी से धीरे-धीरे भर दें।

बादशाह यह सब कुछ बेहद ध्यानपूर्वक देख रहे थे। जैसे-जैसे पानी का स्तर बढ़ रहा था, वैसे-वैसे बंदरिया अपने बच्चे को सीने से चिपकाए हौद के बीच गड़े बांस पर ऊपर चढ़ती जा रही थी।

अब पानी का स्तर इतना बढ़ चुका था कि बंदरिया की कमर तक आ पहुंचा था। बंदरिया ने अपने बच्चे को अपने हाथों में पकड़ा और बांस के सबसे ऊपरी सिरे पर जा बैठी।

यह देखकर बादशाह बोले, ‘‘देखा बीरबल! बंदरिया अपने बच्चे की जान बचाने के लिए कितनी मेहनत कर रही है। इसका मतलब तो यह हुआ कि बच्चे की जान इसे अपनी जान से कहीं ज्यादा प्यारी है।’’

इस बीच पानी का स्तर बढ़कर बंदरिया की गर्दन तक आ पहुँचा था। यहां तक कि उसके नाक-कान में भी पानी भरने लगा था। लगता था कि कुछ ही देर में वह पानी में डूब जाएगी।

कुछ देर बंदरिया ने इधर-उधर ताका और उसके बाद बच्चे पर पैर रखकर खड़ी हो गई। अब वह अपने बच्चे के ऊपर खड़ी पानी से बाहर आने की चेष्टा कर रही थी।

‘‘अब देखिए जहांपनाह।’’ बीरबल बोला, ‘‘यह बंदरिया अपनी जान बचाने के लिए अपने बच्चे तक की परवाह नहीं कर रही। बच्चे को अपने पैरों तले डालकर अपनी जान बचाने की कोशिश में है। क्या यह सब सिद्ध नहीं करता कि अपनी जान सबसे ज्यादा प्यारी होती है।’’

बादशाह से कोई जवाब देते न बन पड़ा। वह बोले, ‘‘बीरबल! तुम ठीक ही कहते थे, जीवन सभी को प्यारा होता है।

बीरबल मुस्कराया और नौकरों को निर्देश दिया कि पानी का स्तर कम कर दें ताकि बंदरिया और उसके बच्चे को बाहर निकाला जा सके।

प्रस्तुति
हरिहर पुरी
मठा प्रशासक
श्रीमनकामेश्वर मंदिर, आगरा