
dr ranjana bansal and akanksha sharma
आगरा। चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करने का ख्वाब देखने वाली आगरा की सफल कारोबारी आज महिलाओं के लिए आदर्श हैं। देश में टाटा मोटर्स की एकमात्र महिला डीलर के रूप में पहचान बना चुकीं डॉ.रंजना बंसल महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। डॉक्टर बनकर दर्द दूर करने के लिए उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई की लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक अप्रत्याशित घटनाक्रम से उन्हें कारोबार की ओर रुख करना पड़ा।
एसएन मेडिकल कॉलेज से किया एमबीबीएस अमेरिका से किया एमएस
डॉ.रंजना बंसल शहर में महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। वे डॉक्टर हैं और आॅटो मोबाइल की सबसे बड़ी डीलर हैं। इसके साथ ही वे कई समाजसेवी संगठनों से जुड़ी हैं। डॉक्टर रंजना बंसल चिकित्सक बनकर लोगों का दर्द करना चाहती थी। इसलिए उन्होंने आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया। इसके बाद वे अमेरिका गईं और वहां से एमएस किया। 1989 में अमेरिका से लौटकर भारत आई। वे स्त्री रोग विशेषज्ञ बनतीं इससे पहले नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक सड़क हादसे में उनके भाई अशोक, भाभी और उनकी बेटी की मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने अशोक आॅटो सेल्स की बागडोर संभाली। कारोबार में उन्होंने आज जो मुकाम हासिल किया है। वो कईयों के लिए आदर्श का पर्याय है। डॉ.रंजना बंसल ने नुनिहाई में 50 बेड का अशोक श्रुति मेमोरियल हॉस्पिटल संचालित किया है। इस अस्पताल में वे महिलाओं के आॅपरेशन निशुल्क करती हैं। युवतियों, महिलाओं के लिए ट्रेनिंग स्कूल का संचालन करती हैं और अपने प्रतिष्ठान में रोजगार देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करती हैं।
कंप्यूटर युग की क्रांति से दिया महिलाओं को रोजगार
कंप्यूटर महिलाओं के लिए एक हौवा हुआ करता था। नारी अस्मिता समिति की अध्यक्ष आकांक्षा शर्मा ने शर्मा टेलीविजन कंप्यूटर संस्थान में महिलाओं को कंप्यूटर सीखने के लिए प्रेरित किया। समिति की अध्यक्ष आकांक्षा शर्मा बताती हैं कि उस समय कंप्यूटर महिलाओं को एक हौवा लगता था। लेकिन उन्होंने महिलाओं को मोटिवेट किया। कई लड़कियों ने कंप्यूटर सीखा और आज दिल्ली, गुड़गांव और कई राज्यों में अपने पैरों पर खड़ी हैं। उनका कहना है कि नारी अस्मिता संगठन का प्रमुख काम ? महिलाओं को मंच पर लाना है। महिलाओं के पास कई हुनर होते हैं लेकिन, परिवार और पति के चलते वे अपना हुनर सभी के सामने नहीं ला पाती हैं। ये मंच घर की महिलओं के लिए है जो महिलाओं को घर, परिवार और उनके हुनर निखारने का काम करता है। उनके यहां आने वाली कई महिलाएं ऐसी हैं, जो चुप रहा करती थी। लेकिन, आज साहित्य, कला, वाद विवाद में उनका कोई सानी नहीं है। महिलाओं ने अपने हुनर को निखार कर अपने घर का माहौल बदल दिया।

Published on:
08 Mar 2018 11:56 am
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