30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ताजमहल का ये हिस्सा साल में सिर्फ तीन दिन खुलता है, जानिए 10 रोचक तथ्य

-श्वेत संगमरमर पर उकेरा गया ताजमहल हर किसी को हैरान कर देता है। आइए जानते हैं ताजमहल के बारे में ऐसी 10 बातें, जो आपने शायद ही पहले कभी सुनी होंगी।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

आगरा

•

image

Amit Sharma

•

Updated: 9 Aug 2019, 5:00 PM IST

ताजमहल

ताजमहल

आगरा। ताजमहल (Tajmahal)। मुगल बादशाह शाहजहां (Shajhanan) ने दुनिया को नायाब तोहफा दिया है। ताजमहल मोहब्बत का प्रतीक है। इसका कारण यह है कि शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण अपनी प्रिय बेगम मुमताज (Mumtaj) महल की याद में कराया था। श्वेत संगमरमर पर उकेरा गया ताजमहल हर किसी को हैरान कर देता है। आइए जानते हैं ताजमहल के बारे में ऐसी 10 बातें, जो आपने शायद ही पहले कभी सुनी होंगी।

यह भी पढ़ें
August Kranti: महिला नायक जिनके जुनून से छूट गये थे अंग्रजों के पसीने, थाने में फेंक दिया था बम

1.ताजमहल का निर्माण मुमताज (1 सितम्बर 1593- 17 जून 1631) की याद में किया गया है। मुमताज पर्सिया देश की राजकुमारी थी। मुमताज की मौत 1631 में 14वीं संतान गौहर बेगम को जन्म देते समय बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) में समय हुई थी।

2.शाहजहां ने 1631 में ताजमहल के निर्माण की घोषणा की, लेकिन निर्माण 1632 में शुरू हुआ। ताजमहल के निर्माण की व्यापक तैयारी की गई।

3.ताजमहल के निर्माण पर तब 3.20 करोड़ रुपये की लागत आई। आज से तुलना करें तो यह लागत करीब 53 अरब रुपये बैठती है।

4. उस्ताद अमहद लाहौरी की देखरेख में ताजमहल का निर्माण 20 हजार मजदूरों ने किया। ताजमहल 20 साल में बनकर पूरा हो पाया। बिना रुके लगातार काम चला।

यह भी पढ़ें

अगस्‍त क्रांति की दो बड़ी घटनाएं, बरहन रेलवे स्टेशन और चमरौला कांड, आजादी के दीवानों ने हिला दी थी गोरी हुकूमत

5.ताजमहल के प्रवेश द्वार पर लिखा है- हे आत्मा, तू ईश्वर पास विश्राम कर। ईश्वर के पास शांति के साथ रह तथा उसकी पूर्ण शांति तुझ पर बरसे। ताजमहल के द्वार पर कुरान की आयतें उकेरी गई हैं।

6. ताजमहल की नींव कुआं आधारित है। विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि यमुना दीवार से सटकर बहती रहे। इस बारे में आईआईटी रुड़की ने शोध भी किया है।

7.कहा जाता है कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए ताकि कोई अन्य दूसरा ताजमहल न बनवा सके। इस बारे में कुछ इतिहासकार कहते हैं कि कलाप्रेमी शाहजहां ऐसा काम नहीं कर सकता है। यह हो सकता है कि शाहजहां ने शिल्पकारों को इतनी रकम दे दी हो कि वे कहीं और काम न करें। इसके बाद शिल्पकार कहने लगे हों कि शाहजहां ने तो हमारे हाथ की काट दिए हैं, काम कैसे करें।

यह भी पढ़ें

थाने में, सड़क पर और फोन पर बोल दिया तीन तलाक

8.मुगलकाल के सभी स्मारक लाल पत्थर से बने हैं, लेकिन ताजमहल ही श्वेत संगमरमर से बनाया गया है। ताजमहल बनाने में रंगीन पत्थर पूरी दुनिया से मंगाए गए।

9. ताजमहल में शाहजहां और मुमताज महल की दो कब्रे हैं। ऊपर असली कब्रें हैं, जिनकी नक्काशी देखते ही बनती है। इसके नीचे असली कब्रें हैं। ये साधारण है।

10.मुमताज और शाहजहां की असली कब्रें साल में सिर्फ तीन दिन शाहजहां के उर्स के मौके पर आम पर्यटकों के लिए खोली जाती हैं। पहले ये कब्रें आम पर्यटकों के लिए भी खोली जाती थीं। इन कब्रों पर चढ़ावा भी चढ़ाया जाता था, जो बंद कर दिया गया है। विशिष्ट अतिथियों को भी असली कब्रें दिखाई जाती हैं।

बड़ी खबरें

View All

आगरा

उत्तर प्रदेश