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अगर आपको भी खटकता है बात बात पर मां बाप का रोकना टोकना तो एक बार जरूर पढ़ लीजिए ये किस्सा

  कहानी के माध्यम से जानिए जो आपको खटकती है, वो किस तरह आपके संस्कार के रूप में जीवन में आपका साथ देती है।

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आगरा

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suchita mishra

Mar 31, 2019

घर से इंटरव्यू के लिए निकलते हुए एक युवक सोच रहा था, काश! इंटरव्यू में आज कामयाब हो गया,तो अपने पुश्तैनी मकान को अलविदा कहकर यहीं शहर में सेटल हो जाऊंगा। मम्मी पापा की रोज़ की चिक चिक, मग़जमारी से छुटकारा मिल जायेगा। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक होने वाली चिक चिक से परेशान हो गया हूँ। जब सो कर उठो,तो पहले बिस्तर ठीक करो,फिर बाथरूम जाओ,बाथरूम से निकलो तो फरमान जारी होता है नल बंद कर दिया? तौलिया सही जगह रखा या यूंही फेंक दिया? नाश्ता करके घर से न निकलो तो डांट पड़ती है, पंखा बंद किया या चल रहा है? क्या क्या सुनें यार, नौकरी मिले तो घर छोड़ दूंगा।

ऑफिस में बहुत सारे उम्मीदवार बैठे थे, बॉस का इंतज़ार कर रहे थे, दस बज गए, युवक ने देखा पैसेज की बत्ती अभी तक जल रही है, मां की बात याद आ गई तो बत्ती बुझा दी। ऑफिस के दरवाज़े पर कोई नहीं था, बग़ल में रखे वाटर कूलर से पानी टपक रहा था। पापा की डांट याद आ गयी तो पानी बन्द कर दिया। बोर्ड पर लिखा था, इंटरव्यू दूसरी मंज़िल पर होगा। सीढ़ी चढ़ना शुरू किया तो देखा कि सीढ़ी की लाइट भी जल रही थी, बंद करके आगे बढ़ा तो एक कुर्सी रास्ते में थी। उसे हटाकर ऊपर गया तो देखा पहले से मौजूद उम्मीदवार जाते और फ़ौरन बाहर आ जाते। पता किया तो मालूम हुआ बॉस फाइल लेकर कुछ पूछते नहीं, वापस भेज देते हैं।

जब उस युवक का नंबर आया तो उसने फाइल मैनेजर की तरफ बढ़ा दी। कागज़ात पर नज़र दौडाने के बाद उन्होंने कहा कब ज्वाइन कर रहे हो? उनके सवाल से उसे लगा जैसे मज़ाक़ किया हो। लेकिन बॉस ने कहा कि ये मज़ाक़ नहीं हक़ीक़त है। आज के इंटरव्यू में किसी से कुछ पूछा ही नहीं, सिर्फ CCTV में सबका बर्ताव देखा। सब आये लेकिन किसी ने नल या लाइट बंद नहीं किया। धन्य हैं तुम्हारे मां बाप, जिन्होंने तुम्हारी इतनी अच्छी परवरिश की और अच्छे संस्कार दिए।

जिस इंसान के पास Self discipline नहीं वो चाहे कितना भी होशियार हो, मैनेजमेंट और ज़िन्दगी की दौड़ धूप में कामयाब नहीं हो सकता। इसके बाद जब वो युवक घर पहुंचा तो उसने मम्मी पापा को गले लगाया और उनसे माफ़ी मांगकर उनका शुक्रिया अदा किया।

कहानी की सीख
ज़िन्दगी की आजमाइश में उनकी छोटी छोटी बातों पर रोकने और टोकने से जो हासिल होता है, उसके मुक़ाबले डिग्री की कोई हैसियत नहीं है। जिंदगी में सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं, तहज़ीब और संस्कार का भी अहम स्थान है।