
आगरा। लगातार बिगडती जीवनशैली से जहां एक ओर महिलाएं बांझपन की ओर अग्रसर हो रही हैं, तो दूसरी ओर पुरूष भी बांझपन में बराबर की भूमिका निभा रहे हैं। उक्त बातें आईवीएफ व स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. दीक्षा गोस्वामी और डा. शैमी बंसल ने एमजी रोड स्थित मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम में आयोजित निःशुल्क इनफर्टिलिटी ओपीडी कैंप में कहीं। इस कैंप में आईवीएफ एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों ने 100 से अधिक महिलाओं एवं उनके पतियों की जांच कर बांझपन पर निःशुल्क सलाह प्रदान की। साथ ही कैंप में शुक्राणु की जांच निःशुल्क, इनफर्टिलिटी की जांच, बच्चेदानी के मुंह की जांच अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से की गई। शिविर में पैथोलाॅजी जांचों पर 20 प्रतिशत और अल्ट्रासाउंड जांच पर 30 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई थी। आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने बताया कि निःसंतान होना कोई अभिशाप नहीं है। आईवीएफ यानि टेस्ट ट्यूब तकनीक से संतान सुख प्राप्त किया जा सकता है।
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नि:संतानता के लिए महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी जिम्मेदार
निःसंतानता के लिए ऐसा नहीं है कि केवल महिलाएं ही जिम्मेदार हैं, बल्कि पुरूष भी उतने ही जिम्मेदार हैं। इलाज के द्वारा महिला या पुरूष की समस्या को दूर कर घर के आंगन में किलकारी गूंज सकती है। डा. शोभना ने बताया कि निःशुल्क इनफर्टिलिटी कैंप रेनबो आईवीएफ की ओर से सिलसिलेवार रूप से न सिर्फ जनपद में बल्कि जनपद से बाहर भी विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. ऋषभ बोरा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड या रेडियोलाॅजी जांचों में बढती तकनीक बांझपन के इलाज में मददगार साबित हो रही है। शिविर में डॉ. विश्वदीपक ने कायचिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कीं। शिविर में पंजीकरण कराने वाले दंपतियों में से एक लकी ड्राॅ विजेता को रेनबो आईवीएफ में एक आईवीएफ साइकिल मुफत दी गई।
Published on:
12 Apr 2018 10:44 am
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