
जैनमुनि विहर्ष सागर ने किया ऐसा कि Jain Samaj में हड़कम्प, घर-घर में बनने लगा शुद्ध भोजन, देखें तस्वीरें
आगरा। राष्ट्रसंत मुनिराज विहर्ष सागर महाराज ने ऐसा कर दिया है कि जैन समाज में हड़कम्प मचा हुआ है। कमलानगर के घर-घर में शुद्ध भोजन बन रहा है। जैन मुनि की एक अनोखी क्रिया ने धार्मिक वातावरण की बयार बहा रखी है। असल में जैन मुनि बिना बताए किसी के भी घर पर आहार के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसा आगरा में पहली बार हो रहा है। प्रायः जैन मुनि पहले से निर्धारित घरों में आहारचर्या के लिए जाते हैं।
शिखर चंद जैन सिंघई के घर पहुंचे मुनि
कमलानगर में पर्यूषण पर्व पर राष्ट्रसंत मुनिराज विहर्ष सागर महाराज को अचानक अपने घर के द्वार पर देख कर कर आगरा दिगंबर जैन परिषद के पूर्व अध्यक्ष शिखर चंद जैन सिंघई की आँखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। मुंह से बरबस निकल पड़ा कि आज मैं धन्य हो गया। भगवान महावीर स्वामी के रूप में आहार लेने मुनिराज घर पधारे हैं। आनन-फानन में घर के लोगों ने पड़गाहन की व्यवस्था की। चौके की व्यवस्था हेतु पूरी तैयारी कुछ ही मिनटों में कर मुनिराज की आहारचर्या की व्यवस्था कर उनको आहार ग्रहण कराया गया।
हर गृहस्थ श्रावक बने
पर्यूषण पर्व में रोमांचित लोग इस दृश्य को देख कहने लगे- " ताजनगरी में चातुर्मास का शोर,गुरु विहर्ष सागर हमारे घर की ओर।" पर्यूषण पर्व जैन धर्म का प्रमुख पर्व है। मुनिराज विहर्ष सागर का मानना है कि हर गृहस्थ श्रावक बने और शुद्ध भोजन करे। प्राचीन काल में दिगंबर संत किसी के भी घर की तरफ चल देते थे और वहीं पड़गाहन कर श्रावक से आहार ग्रहण करते थे। उसी प्राचीन पद्धति पर चलते हुए विहर्ष सागर महाराज ने घर-घर में हल्लाबोल चला रखा है। उद्देश्य है पर्यूषण पर्व पर हर घर में शुद्ध भोजन बने और साधु को आहार कराए।
जैन परिवारों में श्रावक बनने को होड़
कमलानगर में प्रत्येक जैन श्रावक अपने द्वार की ओर देखता है कि पता नहीं किस श्रावक के घर बैंडबाजों के साथ मुनिराज का काफिला आ जाये। घरों में न जाने किसके पुण्य का उदय हो किनदिगंबर संत की आहारचर्या उसके घर सम्पन्न हो। सभी जैन परिवारों में श्रावक बनने को होड़ लगी हुई है। आहार देने की गरीब-अमीर वर्ग के लोगो में भावना जागृत हो रही है।
आहार की तैयारी रखें- सुनील जैन
विहर्ष मुनि संघ के प्रवक्ता पूर्व पार्षद सुनील जैन ने बताया कि मुनिश्री का आहार तह किसी भी चौके में हो जाता है, पर भावना है सारे कमलानगर को श्रावक बनाने की। जैन संत वो अतिथि हैं जिनकी न तो आने की तिथि है और न ही जाने की कोई तिथि है, इसलिए वो विशेष अतिथि हैं। उन्होंने जैन समाज के लोगों का आह्वान किया है कि वे प्रतिदिन इस तरह से तैयारी करें कि उनके यहां राष्ट्रसंत मुनिराज विहर्ष सागर महाराज आहारचर्या के लिए आ सकते हैं।
Published on:
06 Sept 2019 07:37 pm
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