
pulwama
आगरा। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर आतंकवादी हमले के बाद पूरा देश गुस्से में है। ऐसे में समाज का राह दिखाने वाले कविगण कैसे शांत रह सकते हैं। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से गम और गुस्से का इजहार किया है। कवियों का शब्दरूपी आक्रोश आपका खून भी खौला सकता है। यहां पढ़िए आगरा राइटर्स क्लब के सदस्य कवियों की चुनिंदा कविताएं-
ऐसे नीच दानवों की गर्दन मरोड़िये..
क्रूर हाथ बढ़ रहे, नापाक सीढ़ी चढ़ रहे,
ऐसे नीच दानवों की गर्दन मरोड़िये।
वीर हैं सपूत मेरे, मौत चाहे राह घेरे,
लौट के न पीछे देखा, लक्ष्य जो भी ले लिये।
वक्त अब आ गया है सोचने का वक्त नहीं,
आतंक के मुख आरडीएक्स परोसिये।
टूक-टूक हुई छाती, देखके वीरों की माटी,
मरें नही शर्म से हुजूर कुछ कीजिये।
(2)
जोशीली कविता के गाने से कुछ होगा नहीं,
हाथ में अपने हथियार उठा लीजिये।
चलो मेरे देशवासी देश को बचाना तुम्हें ,
रणभूमि लाल रक्त मुंड पटा दीजिये।
लातों के भूत ये तो बातों से मानेंगे नहीं,
सच्ची-सच्ची खरी-खरी बात बता दीजिये।
चाणक्य चन्द्रगुप्त जनने हैं जननी तुझे,
घनानंद रूपी आततायी मिटा दीजिये।
-गया प्रसाद मौर्य रजत -आगरा
ज़रूरी है कि अब तो जाग जाएं..
ज़रूरी है कि अब तो जाग जाएं,
जो करते हैं हमारी रहनुमाई!
क़दम कुछ ठोस अपनाने ही होंगे,
कि जिस से हो न अपनी जग हँसाई!!
अगर अब भी न हम कुछ कर सके तो,
शहीदाने वतन से क्या कहेंगे
फ़कत तस्वीर ही बाक़ी है जिनकी,
समूची देह भी घर आ न पाई!!
-भरत दीप
काश्मीर में पलते देखो..
काश्मीर में पलते देखो, पिल्ले कई ***** के
खिला रही महबूबा उनको, नित हलवे बदाम के।
(१)
वाहन में जाएँगे सैनिक ,
खबर कौन पहुँचाई ।
कौन घुसा बैठा जयचंदी,
खबरी था हरजाई ।।
गद्दारों को पैसे मिलते ,गद्दारी के काम के
काश्मीर में पलते देखो,पिल्ले कई ***** के
(२)
लड़कर वीरगति को पाते ,
जाने कितने संग ले जाते
इनकी शौर्य कहानी कविगण
लिखते और सुनाते ।।
स्वागत में खुलते दरवाजे
पावन हरि के धाम के ।
काश्मीर में......
(३)
बेदर्दी से निर्दोषों की ,
बैठे ठाले जान गयी ।
हत्यारों को सारी दुनिया,
क्षणभर में पहचान गयी ।।
रावण के संहारी हैं हम,
अनुयायी श्री राम के ।
नहीं खिला पाएगी हलवे ,
कल से अब बादाम के ।।
-प्रेमलता मिश्रा, आगरा
रक्त से तिलक सजाने दो
अब ना रोको बन्दूकों को,
असुर संहार मचाने दो,
मानवता पर लगी है कालिख,
इसको आज मिटाने दो,
जहाँ पनपतीं हैं ये फसलें,
ऐसे खेत जलाने दो,
साँपों को बाहर कर बिल से
बीच बाज़ार जलाने दो,
बेदर्दों को बेदर्दी से,
मार के सबक सिखाने दो,
भाल पे वीरों को दुश्मन के,
रक्त से तिलक सजाने दो,।
-हरविंदर पाल सिंह
करना है तो कुछ कर के दिखलाओ
मत करना अब राजनीति
शहीदों की चिताओं पर
खत्म कर दो आतंकियों को
उखाड़ फेंको जड़ से इन्हें
कि फिर न पनप पाएँ कभी
अमन-चैन कायम करो
बंद करो ये खून बहाना
हमारे भाइयों, बेटों, सरपरस्तों का
करो ऐसा उपाय कुछ कि
नेस्तनाबूद हो जाँय ये दहशतगर्द
ये आतंक और आतंकवादी
वरना मत गरज-गरज चिल्लाओ
डींगें मत हांको
करना है तो कुछ कर के दिखलाओ
आतंक और आतंकवादियों को समूल
नष्ट करके दिखलाओ ।
-गीता यादवेन्दु
राष्ट्र की छाती भभकती नापाक ऐसी हरकतों पे
मत कहो आतंकी हमला बुजदिली-ऐलान है ये
भुखमरी से जूझता-मरता कि पाकिस्तान है ये
राष्ट्र की छाती भभकती नापाक ऐसी हरकतों पे,
सुदृढ़ रखता मान्यताएँ शेर हिन्दुस्तान है ये
-डॉ. राजेन्द्र मिलन
अब तो देखो युद्ध, मांगता है पुलवामा
पुलवामा में धैर्य की, बही खून की धार।
अब सरहद को खोल दो, नहीं और उपचार।
नहीं और उपचार, पाक के गलत इरादे।
छद्मी रखता भेष, करता झूठे वायदे।
कहे मित्रवर 'अश्रु' ,शत्रु से चले न रामा।
अब तो देखो युद्ध, मांगता है पुलवामा।।
-अशोक बंसल
खोए अपने लाल
दृश्य देख है द्रवित मन, जन-जन है बेहाल।
भारत माँ ने आज फिर, खोए अपने लाल।।
कतरा-कतरा लहू का, करता यही सवाल।
वीरों को कितने अभी , देने होंगे भाल।।
माथे का चंदन बनी , रक्त सनी वो धूल।
तुम्हें समर्पित कर रहा, भाव,शब्द,और फूल।।
-मान सिंह 'मनहर'
दिव्यांग दर्पण पत्रिका परिवार
Updated on:
15 Feb 2019 03:57 pm
Published on:
15 Feb 2019 12:20 pm
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