ज्योतिषाचार्य डॉ.अरविंद मिश्र ने कापसर्प योग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राहु और केतु को इस नम मंडल के दो बिंदुओं की संज्ञा दी गई है। दूसरे शब्दों में राहु और केतु की धुरी पर ही संपूर्ण नभ मंडल भ्रमण कर रहा है। इन्हें छाया ग्रह भी कहा जाता है। यदि जन्मांग जन्म कुंडली में राहु और केतु को बिंदु मानकर राहु से केतु तक या फिर केतु से राहु तक एक सीधी रेखा खींचने से सारे सात ग्रह, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि इस रेखा के किसी भी एक ओर आ जाएं, तो इस ग्रह क स्थिति को काल सर्प योग माना गया है।