
tajmahal
आगरा। भारत की शान है ताजमहल। एक बार जो ताजहल देखता है, देखता ही रह जाता है। श्वेत संगमरमर की यह इमारत हर किसी को अपने मोहपाश में बांध लेती है। आगरा के प्रसिद्ध गीतकार कवि शिवसागर शर्मा ने ताजमहल को केन्द्र में रखकर कई गीत और मुक्तक लिखे हैं। जब मंच पर पढ़ते हैं तो लोग उनके मोहपाश में बंध जाते हैं। सूरसदन में हुए कवि सम्मेलन में उन्होंने ताजमहल संबंधी गीत सुनाए तो लोग सुनते ही रह गए।
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कवि शिवसागर शर्मा का कहना है कि ताजमहल को पर्यावरण से नहीं, देखने की नजर से खतरा है। ये पंक्तियां देखिए
ऐसे यमुना के पानी में झांको नहीं
संगेमरमर की तबियत मचल जाएगी,
गोरे मुखड़े से घूंघट हटाओ नहीं
खूबसूरत इमारत पिघल जाएगी।
चांदनी रात में ताज के फर्श पर
यूं न टहलो ये मीनार हल जाएगी
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ताजमहल पर शरद पूर्णिमा की रात्रि में लगने वाले मेले के संदर्भ में ये पंक्तियां देखिए
गोरी मल-मल के जल में नहाओ नहीं
कोई यमुना में डुबकी लगा जाएगा
सीढ़यों पर दुपट्टा गिराओ नहीं
पत्थरों का हृदय चोट खा जाएगा
चूड़ियों को यहां खनखनाओ नहीं
कोई संगीत चुपकी लगा जाएगा
ताज पर आज की रात जाओ नहीं
कोई गालों पर थपकी लगा जाएगा।
शिवसागर शर्मा का ये गीत बहुत लोकप्रिय है-
आलिंगन को व्याकुल हैं चारों मीनारें ताज की
दो बांहें शाहजहां की हैं, दो बहियां हैं मुमताज की
इसके स्फटिक धवल आंगन में ऋतु बंसत छाया है
लगता है भू पर जन्नत का नूर उतर आया है
इसके स्वर्णजड़ति गुंबद में मणियां बोल रही हैं
फव्वारों पर स्वर्ग की परियां डोल रही हैं
यमुना के उस पार देखती हैं शोभा मेहताब की
दो आँखें शाहजहां की है,दो अखियां हैं मुमताज की
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Published on:
13 Aug 2018 05:03 pm
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