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केवट ने प्रभु श्रीराम को नाव में बैठाने से क्यों किया किया था मना, जानिये किस बात का था डर…

प्रभु श्री राम केवट को बुलाते हैं काफी समझाने के बाद केवट गंगा पार उतारने के लिये तैयार होता है और यह आग्रह करता है कि...

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आगरा

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Dhirendra yadav

Oct 10, 2018

Kevat Samvad

Kevat Samvad

आगरा। रामलीला मैदान में हुई लीला में प्रभु श्री राम महाराज दशरथ के पास जाते हैं। दशरथ जी द्वारा प्रभु श्री राम को महारानी कैकई द्वारा मांगे गये दोनों वरदान बताये जाते हैं। प्रभु श्री राम राम वरदान सुनकर भ्राता लक्ष्मण व मां जानकी के साथ वनवासी रूप धारण कर रथ में बैठकर वन में ऋषि श्रृंगवेरपुर के आश्रम के लिये प्रस्थान करते हैं। वनवास का रथ फूलों से सुसज्जित था तथा इस रथ पर प्रभु श्री राम, मां जानकी, भ्राता लक्ष्मण के साथ वनवासी श्रृंगार में थे। वनवासी श्रृंगार रास्ते में दर्शकों को मनभावन लग रहा था। जगह-जगह रास्ते में पुष्प वर्षा कर तथा आरती उतार कर भक्तजन अपने को सौभाग्यशाली मान रहे थे।

सुमंत जी से किया ये अनुरोध
आश्रम पर पहुंचने के बाद श्री राम द्वारा अपने साथ सुमन्त जी को वापस भेजने के लिये अनुरोध करते हैं, परन्तु सुमन्त तैयार नहीं होते। महाराज दशरथ व दोनों छोटे भाई व तीनों महारानी का ध्यान रखने का वास्ता देकर श्री राम काफी समझा-बुझा कर सुंमत जी को अयोध्या के लिये रवाना करते हैं। श्रीराम, लक्ष्मण व मां जानकी मथुरेश जी मन्दिर (भारद्वाज जी मुनि के आश्रम) में गंगा के तट पर उतरते हैं। इसके बाद की लीला में श्रीराम केवट संवाद शुरू होता है।

केवट संवाद लीला
प्रभु श्री राम केवट को बुलाते हैं काफी समझाने के बाद केवट गंगा पार उतारने के लिये तैयार होता है और यह आग्रह करता है कि आपके चरण स्पर्श से पत्थर अहिल्या बन जाती है। अतः मेरी नाव न बदल जाये, नाव बदल गई तो परिवार का पालन कैसे करूंगा और यह कहकर केवट श्रीराम के चरण धोता है।


भव्य निकली शोभायात्रा
प्रभू श्री रामचन्द्र जी की वनवास की शोभायात्रा रामलीला मैदान से प्रारंभ होकर सुभाष बाजार, दरेसी नं 1, रावतपाड़ा, कश्मीरी बाजार, कचहरी घाट, बेलनगंज होती हुई जमुना किनारे पर मथुरेश जी मन्दिर के सामने केवट संवाद लीला तत्पश्चात सवारी हाथीघाट पर समाप्त हुई। काला महल का किशोर बैण्ड वनवास के रथ के आगे अपनी मधुर ध्वनि से अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। वहीं दूसरी ओर लाला चन्नोमल की बाराहदरी में पंडित मनोज भारद्वाज द्वारा किये जा रहे रामचरित मानस के पाठ में केवट संवाद एवं श्री राम के वनवास की लीला का वर्णन किया गया।