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उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, लगेगी पाठशाला, किसान क्रेडिट कार्ड भी मिलेगा आसानी से

प्रमुख सचिव उप्र शासन अमित मोहन प्रसाद की अध्यक्षता में आगरा व अलीगढ़ मण्डल की मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी का हुआ आयोजन।

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आगरा

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Dhirendra yadav

Jun 03, 2018

Kharif productivity

Kharif productivity

आगरा। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खुश खबरी है। अब किसानों को क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उनके लिए विशेष अभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसके अंतर्गत किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है या कार्ड एक्टिव नहीं है, उनके लिए अभियान चलाकर बैकों के माध्यम से रूपे कार्ड बनवाया जाएगा। यह जानकारी प्रमुख सचिव उप्र शासन अमित मोहन प्रसाद ने आयुक्त सभागार में आयोजित आगरा व अलीगढ़ मण्डल की मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में दी।

जरूर कराएं फसल बीमा
प्रमुख सचिव उप्र शासन अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि किसान फसलों का बीमा अवश्य करायें, ताकि आपदा से उनको क्षति होती है तो उसकी क्षतिपूर्ति हो सके। उन्होंने बताया किसानों की मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने पर बल देते हुए कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी उन्नति तकनीकी से क्लस्टर में खेती कराकर उसके माध्यम से आस-पास के किसानों को उन्नति तकनीकि की जानकारी उपलब्ध कराएं। प्रमुख सचिव कृषि ने कहा है कि आज भी उत्तर प्रदेश में 65 प्रतिशत लोगों की आजीविका कृषि पर आधारित है। खेती में समय का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है, विलम्ब से खेती की जाने पर उत्पादकता घटती है।


लगेगी किसानों की पाठशाला
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री किसानों की समस्याओं के निवारण के प्रति अत्यन्त गम्भीर है। प्रदेश में सभी किसानों को कृषि की उन्नत तकनीकों की जानकारी प्राप्त हो, इसके लिए किसान पाठशाला की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए किसान पाठशाला इस वर्ष पुनः संचालित की जाएगी तथा किसानों को कृषि से सम्बन्धित पुस्तिका भी दी जाएगी। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए कृषि में लागत घटे, उत्पादन बढ़े तथा उचित मूल्य मिले ये तीन चीजें जरूरी है। उन्होंने बताया की संशोधित अधिनियम के अन्तर्गत थोक व्यापारी किसानों से सीधे खेत से ही कृषि उत्पाद खरीद सकते हैं। इससे किसान कृषि उत्पादों की टूट-फूट व खराब होने से बच जा सकेगा।


अब कहीं भी बेचे फसल
किसान अपना उत्पाद किसी भी मण्डी में बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि वह उपभोक्ता को सीधे हाट बाजार में अपना उत्पादन बेचता है तो कोई मण्डी शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि संशोधित अधिनियम के अनुसार अब मण्डियां प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से भी बनायी जा सकती हैं, इससे प्रतिस्पर्धा के साथ ही किसानों को उचित मूल्य मिल सकेगा।