
हर बार की तरह इस बार भी Krishna Janmashtami 14 और 15 अगस्त को है, ऐसे में लोगों के मन में संशय बना हुआ है कि वे व्रत किस दिन रखें। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरबिंद मिश्र के मुताबिक वैसे तो भगवान सिर्फ भाव के भूखे होते हैं इसलिए श्रद्धानुसार आप किसी भी दिन व्रत रखकर जन्माष्टमी मना सकते हैं, लेकिन यदि आप हिंदू पंचांग के अनुसार चलना चाहते हैं तो 15 अगस्त को मनाना ज्यादा बेहतर होगा।
दरअसल 15 अगस्त की Krishna Janmashtami उदया तिथि में होने के कारण शास्त्रों के अनुरूप है क्योंकि शास्त्रों में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। हिंदू पंचांग भी इसी के अनुरूप बनाए जाते हैं। वैसे अष्टमी तिथि 14 अगस्त को शाम 7.46 बजे अष्टमी शुरू होगी और दूसरे दिन शाम 5.40 बजे तक रहेगी। ऐसे में लोगों के दिमाग में है कि भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि में ही कराया जाए तो बेहतर है क्योंकि 15 को 5.40 बजे के बाद नवमी तिथि लग जाएगी। ऐसे में कोई भ्रम न रखें क्योंकि नवमी तिथि होने के बावजूद अष्टमी तिथि का देर रात तक असर रहेगा।
ऐसे करें पूजन
सुबह स्नान करके भगवान के सामने बैठकर धूप आदि लगाकर मन ही मन व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन श्रद्धानुसार व्रत रखें। दिन में फलाहार ले सकते हैं। रात मेें शुभ मुहुर्त में कान्हा का जन्मोत्सव मनाएं। ऐसे में लड्डू गोपाल की प्रतिमा लाकर उसे दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें माखन मिश्री व अन्य व्यंजन, फल, फूल आदि अर्पित करें। धूप, दीप आदि जलाएं व उन्हें झूला झुलाएं व आरती और भजन आदि गाएं। अगले दिन सुबह स्नान के बाद व्रत खोलें।
मंदिरों में चढ़ता 56 भोग
इस दिन कान्हा के ज्यादातर मंदिर सुबह से ही सज जाते हैं। उन्हें 56 भोग लगाए जाते हैं। 56 भोग में वे चीजें होती हैं जो उन्हें बेहद पसंद हैं। सामान्य तौर पर छप्पन भोग में माखन मिश्री, खीर और रसगुल्ला, जलेबी, जीरा लड्डू, रबड़ी, मठरी, मालपुआ, मोहनभोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चिला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, खिचड़ी, बैंगन की सब्जी, लौकी की सब्जी, पूरी, बादाम का दूध, टिक्की, काजू, बादाम, पिस्ता और इलाइची होते हैं। कई लोग 16 प्रकार की नमकीन, 20 प्रकार की मिठाइयां और 20 प्रकार ड्राई फ्रूट्स भी चढ़ाते हैं।
Published on:
10 Aug 2017 12:47 pm
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