
makar sankranti
आगरा। हिन्दू मान्यताओं में मकर संक्रांति का पर्व बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। वैसे मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन, इस बार ये पर्व 14 जनवरी को नहीं मनाया जाएगा। कई लोगों में इस पर्व को लेकर दुविधाएं हैं। ज्योतिषाचार्य और वैदिक सूत्रम के चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम का कहना है कि मकर संक्रांति का पर्व हिंदुओं के देवता सूर्य ग्रह को समर्पित है। जब सूर्य गोचरीय भ्रमण चाल के दौरान धनु राशि से मकर राशि या दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर स्थानांतरित होता है, तब संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है।
छह माह के लिए खुलते हैं स्वर्ग लोक के दरवाजे
मकर संक्रांति से सूर्य ग्रह के उत्तरायण होते ही देवलोक या स्वर्ग लोक के दरवाजे छह माह के लिए खुले रहते हैं। वैदिक हिन्दू ज्योतिष में संक्रांति का मतलब है, सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश करना है। इसलिए इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2019 को मनाया जाएगा। इस बार सूर्य देव 14 जनवरी 2019 को रात्रि में 7 बजकर 43 से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 2019 में 15 जनवरी को ही मान्य होगा। क्योंकि 15 जनवरी को सूर्योदय काल में सूर्य देव मकर राशि में स्थित होंगे। जो कि वैदिक हिन्दू शास्त्रों में मान्य है। वैदिक प्राचीन काल से अधिकांश हिन्दू त्योहार चंद्रमा की स्थिति के अनुसार मनाए जाते हैं, लेकिन यह मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य के चारों तरफ पृथ्वी के चक्र की स्थिति के अनुसार मनाया जाता है। इसलिए वैदिक हिंदू पंचांग के अनुसार कोई तय तिथि घोषित नहीं की जा सकती है।
संक्रांति से ही सर्दियों के मौसम का अंत
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि मकर संक्रांति से ही सर्दियों के मौसम का अंत माना जाता है। सर्दियों की तुलना में लम्बे दिनों की शुरुआत हो जाती है। इस मकर संक्रांति के त्यौहार पर लोग सूर्य की प्रार्थना करते हैं और आदि गुरु शंकराचार्य के अनुसार गंगाजी, गंगा सागर, कुंभ और प्रयाग राज में स्नान करना चाहिए।
Published on:
06 Dec 2018 11:24 am
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