
डॉ. हिमांशु
आगरा। मेटाबॉलिज्म के घटने-बढ़ने से हमारा वजन भी घटता बढ़ता है। अधिक वजन के लिए धीमा मेटाबॉलिज्म भी जिम्मेदार है। आम तौर पर ये माना जाता है कि खान-पान और व्यायाम से मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह इतना सीधा नही है। यह जानकारी रेनबो हॉस्पिटल में मोटापे पर आयोजित एक कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मोटापे से पीड़ित लोगों को दी। आगरा में मोटापे से पीड़ित लोगों की तादाद अनुमान से अधिक है। इसका अंदाजा रविवार को रेनबो हॉस्पिटल में आयोजित मोटापा परामर्श एवं जांच शिविर से लगा।
यूएसए के बाद भारत में भी समस्या
मोटापे से पीड़ित दर्जनों मरीज ऐसे भी थे जो वजन कम करने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी और अन्य तरीकों की जानकारी करने पहुंचे थे। ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल के सभागार में एक कायर्शाला हुई। इसमें चीफ बैरिएट्रिक एन्ड गैस्ट्रो इंटस्टाइनल सर्जन डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि मेटाबॉलिज्म में हमारा शरीर दिन भर में जितनी ऊर्जा लेता है उसका 50 से 70 फीसदी खर्च होता है। मेटाबॉलिज्म के सुस्त पड़ने से मोटापा बढ़ने लगता है। उन्होंने बताया कि पहले मोटापे की सर्वाधिक समस्या यूएसए में थी लेकिन अब भारत में है।
बैरिएट्रिक सर्जरी कब कराएं
उन्होंने कहा कि अगर मोटापे को खत्म कर लिया जाए तो डायबिटीज समेत मोटापे की वजह से लगने वालीं ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल, डिप्रेशन, फैटी लिवर, इनफर्टिलिटी, नसों, जोड़ों और सांस जैसी 50 अन्य बीमारियां भी दूर हो जाएंगी। अगर बीएमआई 32 से अधिक है साथ में आप डायबिटिक व बीपी की परेशानी भी है तो आप ओवरवेट हैं हो बैरिएट्रिक सर्जरी करा सकते हैं। बीएमआई 37 से अधिक है तो यह सर्जरी आपके लिए सटीक इलाज हो सकती है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 23 से 30 के बीच बीएमआई को आदर्श माना गया है। इसके कई और पहलू भी हैं। एक सीमा में मोटापे के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी की जरूरत नही पड़ती क्योंकि ऐसी स्थिति में खान-पान, व्यायाम,लाइफ स्टाइल और व्यवहार में परिवर्तन से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन यह सटीक तभी है जब हम ऐसा कर पाएं। इस दौरान डॉ अभिनव मित्तल, डॉ अनुकूल जैन, डॉ. निशा यादव, डॉ. केशव मल्होत्रा, डॉ. ऋषभ बोरा, डॉ. राजीव लोचन आदि मौजूद रहे।
क्या है बैरिएट्रिक सर्जरी
वेटलॉस सर्जरी को बैरिएट्रिक सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है। इसके लिए जब मरीज आता है तो पहले उसकी काउंसलिंग की जाती है, क्योंकि कई बार मरीज घरवालों के दबाव में आ जाते हैं पर न ही डॉक्टर को सहयोग करते हैं। न ही सर्जरी के बाद की गाइडलाइंस को। सर्जरी कई तरीके से होती है जैसे माल एब्जारविव विधि में पेट के कुछ भाग को अलग कर छोटी आंत के अंतिम छोर से जोड़ दिया जाता है। गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी में पेट का बाईपास करते हैं और आंत के दो अलग अलग चैनल बना दिए जाते हैं। रेस्ट्रैक्टिव विधि में पेट का साइज छोटा कर दिया जाता है। सर्जरी के बाद मरीज को दो से तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है और लगभग एक महीने तक लिक्विड डाइट पर रखने के बाद धीरे धीरे आहार शुरू किया जाता है।
खान-पान में रखें संयम
बैरिएट्रिक डायटीशियन रेणुका डंग ने बताया कि बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद शुरुआत में खान पान से जुडी कुछ समस्याएं होती हैं। लेकिन इसमें सावधानी रखनी चाहिए। चॉकलेट, फास्ट फ़ूड, चिकनाइयुक्त या जबरन खाने से सावधानी रखनी चाहिए।
ट्रंकल ओबेटिसी हृदय पर सीधा करती है आसर
ट्रंकल ओबेसिटी यानि अन्य अंगों के मुकाबले पेट पर चर्बी का अधिक होना। अक्सर आपने सुना होगा कि अभी तो उस व्यक्ति से मेरी बात हुई थी और वह थोड़ी देर बाद ही खत्म हो गया। इस तरह के ज्यादातर मामले ट्रंकल औबेटिसी के होते हैं, जिसमें पेट पर अधिक मोटापे का सीधा असर हृदय पर होता है।
मरीजों की हुई जांच
सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक आयोजित शिविर में करीब 2000 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे। यह सभी मोटापे और उसकी वजह से होने वाली अन्य समस्याओं से परेशान थे। इन मरीजों के कार्ड बनाने के बाद बॉडी मास इंडेक्स 'बीएमआई', ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और ईसीजी जांच कराई गईं। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने परामर्श दिया। मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से कुछ मरीजों को आगामी तिथियाँ दी गईं।
Published on:
14 Aug 2017 01:28 pm
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