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आगरा में होगी मुन्ना बजरंगी की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल की जांच

9 जुलाई को बागपत जिला कारागार में पूर्वांचल के कुख्यात प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी।

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आगरा

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suchita mishra

Jul 10, 2018

munna bajrangi

munna bajrangi

आगरा। सोमवार को बागपत जिला कारागार में मारे गए पूर्वांचल के कुख्यात प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल पुलिस ने बरामद कर ली है। इस पिस्टल को जांच के लिए आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा। यहां बैलेस्टिक यूनिट में इसका परीक्षण किया जाएगा ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि प्राप्त पिस्टल से ही उसकी हत्या की गई है।

ऐसे होगा परीक्षण
जांच के दौरान पहले मौके से मिले खोखों पर बने निशान नोट किए जाते हैं। इसके बाद उस पिस्टल से कुछ और गोलियां चलाई जाती हैं। फिर देखा जाता है कि खोखों पर बने निशान से ये मेल खा रहे हैं या नहीं। अगर निशान समान हों तो माना जाता है कि गोली मौके से बरामद पिस्टल से चली है। यदि निशान मेल न खाएं तो मान लिया जाता है कि गोली किसी अन्य पिस्टल से चलाई गई है।

ये है पूरा मामला
सोमवार सुबह करीब 6:15 बजे पूर्वांचल के कुख्यात मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला कारागार में ताबड़तोड़ नौ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना यूपी की जेल सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिया। बजरंगी की बसपा के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में कोर्ट में पेशी होनी थी। रविवार की रात में ही उसे झांसी जेल से बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। रातभर वो तन्हाई बैरक में रहा। सोमवार की सुबह जैसे ही उसे बैरक से बाहर निकाला गया तो वो पार्क में टहलने लगा। इसी बीच पास की बैरक में बंद सुनील राठी वहां आया। दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इस पर राठी ने बजरंगी पर ताबड़तोड़ नौ गोलियां चला दीं और पिस्टल गटर में फेंक दी। इस घटना में मुन्ना बजरंगी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं सोमवार की शाम को ही उस पिस्टल को पुलिस ने बरामद कर लिया।

बजरंगी पर दर्ज थे 40 से अधिक मुकदमे
जानकारी के मुताबिक मुन्ना बजरंगी ने पहला अपराध 17 साल की उम्र में किया था। उसने वर्ष 1984 में एक कारोबारी की हत्या की थी। पुलिस के मुताबिक वो सौ से अधिक कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के मामलों में शामिल रहा है। उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी व लूट समेत 40 से अधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद वो आपराधिक दुनिया का बड़ा नाम बन गया था।