
Navratri 2018 : देवी मां के नौ नाम और उनकी पूजा से मिलने वाले फल
आगरा। सोमवती अमावस्या आठ अक्बूबर को हैं। इसदिन श्राद्धपक्ष का आखिरी दिन है। अमावस्या के बाद शारदीय नवरात्र शुरू हो जाते हैं। लेकिन, इस बार नवरात्र को लेकर संशय है। पत्रिका टीम ने बात की ज्योतिषाचार्य और वैदिक सूत्रम के चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम से। पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से आरम्भ हो रहे हैं जो कि 18 अक्टूबर तक रहेगें।
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पहले दिन की नवरात्रि में शक्ति के शैलपुत्री रूप की आराधना
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि इस बार सोमवती अमावस्या आठ अक्टूबर को है जो सुबह नौ बजे से शुरू होगी। इसके बाद नौ अक्टूबर तक चलेगी। इसलिए नवरात्रि का पर्व दस अक्टूबर से शुरू होगा। पहले दिन की नवरात्रि में शक्ति के शैलपुत्री रूप की आराधना की जाती है। क्योंकि मां दुर्गा पर्वतराज हिमालय की कन्या हैं। मारकंडेय पुराण के अनुसार, अपने पूर्व जन्म में ये सर्वशक्ति प्रजापति दक्ष की बेटी और भोलेनाथ शंकर जी की पत्नी थीं, तब इनका नाम सती था। नवरात्रि के नौ दिन श्रद्धानुसार माता के विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए। मां की कृपा प्राप्त करने के लिए सप्तशती के मंत्रों से हवन करने का विधान है। सप्तशती के पाठ से मां विशेष प्रसन्न होती है। नवरात्रि के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन कर मां की पूजा करनी चाहिए।
नवरात्रि भारत में हिंदुओं का सबसे प्रमुख पर्व
वैदिक सूत्रम चेयरमैन भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि नवरात्रि भारतवर्ष में हिंदूओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं। लेकिन, चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक पड़ने वाले नवरात्र काफी लोकप्रिय हैं। बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को बसंती नवरात्र तो शरद ऋतु में आने वाले आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है।
महानवरात्र भी कहते हैं
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि चैत्र और आश्विन नवरात्र में आश्विन नवरात्र को महानवरात्र कहा जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि ये नवरात्र दशहरे से ठीक पहले पड़ते हैं। दशहरे के दिन ही नवरात्र को खोला जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रूपों की पूजा को शक्ति की पूजा के रुप में भी देखा जाता है। पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि नवरात्रि में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ अलग-अलग रुप हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा व उपवास किया जाता है। दसवें दिन कन्या पूजन के बाद उपवास खोला जाता है।
Published on:
07 Oct 2018 10:42 am
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