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आगरा। उत्तर प्रदेश ग्रामीण श्रमिक शिक्षा संस्थान के धनौली स्थित आए नीदरलैण्ड के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उनके देश में 12 वीं तक की शिक्षा निशुल्क मिलती है। जो पेरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, उन पर नीदरलैण्ड सरकार द्वारा जुर्माना लगाया जाता है और इसे वसूल भी किया जाता है। यही कारण है कि नीदरलैण्ड में चाइलड लेबर नहीं है।
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हुआ स्वागत
धनौली स्थित बाल श्रमिक विद्यलाय में नीदरलैंड से चार सदस्यीय दल आया। इसमें एलन होईजेनबोस, माइकल एआई, विलमा रोस, लिनीवा विकस्ट्रोम शामिल रहे। स्कूल में इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत उत्तर प्रदेश ग्रामीण श्रमिक शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा, स्कूल की प्रधानाध्यापिका पिंकी जैन, संजय शर्मा, हेमलता गोला, राहुल शर्मा ने फूल माला पहनाकर व तिलकर कर किया।
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बच्चों से मिले विदेशी मेहमान
इन विदेशी मेहमानों के साथ बीडब्लूआई के जेएल श्रीवास्तव और एफएनवी के प्रभु राजेन्द्ररन भी मौजूद थे। इस प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से बात की। उनसे पूछा कि उनकी शिक्षा इस स्कूल में किस तरह चल रही है। इस दौरान स्कूल के बच्चों द्वारा इन विदेशी मेहमानों को देश भक्ति से ओत प्रोत देशभक्ति गीत भी सुनाया।
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ये बोले विदेशी मेहमान
प्रतिनिधिमंडल में शामिल एलन होईजेनबोस ने बताया कि हमारे देश में प्राइवेट और सरकारी दोनों ही तरह के स्कूल हैं, लेकिन बच्चे सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद अच्छा होता है। 12 वीं तक की शिक्षा सभी बच्चों को निशुल्क मिलती है। इसके बाद उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है।
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Published on:
20 Jan 2018 01:08 pm
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