20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

न पुरुष, ना महिला बल्कि एक कार्यकर्ता बना है ABVP का राष्ट्रीय महांमत्री: निधि त्रिपाठी

नवनिर्वाचित राष्ट्रीय महांमत्री नीधि त्रिपाठी ने कहा कि एबीवीपी महिला और पुरूष मे भेद नहीं करता है

2 min read
Google source verification

आगरा

image

Dhirendra yadav

Nov 23, 2019

abvp1.jpg

आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन में नवनिर्वाचित राष्ट्रीय महांमत्री नीधि त्रिपाठी ने कहा कि एबीवीपी महिला और पुरूष मे भेद नहीं करता है, बल्कि कार्यकर्ता की क्षमता और गुणों को देखकर उसका कार्य निर्धारित करता है। इसके पूर्व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के निवर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री आशीष चौहान ने ब्रज भूमि को संतो की भूमि बताते हुए अधिवेशन में हिस्सा लेने आए सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया।

ये भी पढ़ें - नगर निगम की सीमा विस्तार के विरोध में दहन हुआ पुतला, ग्रामीणों बोले ग्राम पंचायत में ही हैं खुश

2019 रहा ऐतिहासिक
निवर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री आशीष चौहान ने उद्घाटन सत्र से ठीक पहले महामंत्री प्रतिवेदन के द्वारा कार्यकर्ताओं के बीच में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा पूरे वर्ष भर किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया की साल 2019 देश के लिए ऐतिहासिक रहा। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा एक देश एक विधान का देखा हुआ सपना पूरा हुआ जब ऐसे देश से धारा 370 को हटा दिया गया। धारा 370 को हटाने के लिए विद्यार्थी परिषद ने 1990 से विभिन्न आंदोलनों को जन्म दिया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने पूरे देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों से अपनी खुशी का कार्यक्रम, शोभा यात्रा के माध्यमों से किया। जिसने कश्मीर चलो मार्च की याद दिलाई।

ये भी पढ़ें - महाराष्ट्र की राजनीति पर बोले यूपी भाजपा अध्यक्ष, बोले शिवसेना से प्रस्तावित गठबंधन में अहंकार आया आड़े

इस तरह बढ़ा परिवार
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पूरे देश में 37 लाख 71 हजार 834 सदस्यता लगभग 8482 कार्यकारिणी के द्वारा की। इस वर्ष एबीवीपी ने अपने सेल्फी विद कैंपस यूनिट अभियान को विशाल रूप देते हुए पूरे देश भर में लगभग 23 हजार 213 कॉलेज कार्यकारिणी का गठन किया। विद्यार्थी परिषद का अभियान मिशन साहसी पूरे देश वर्ष में सबसे चर्चित रहा, जिसमें लाखों छात्राओं ने पूरे देश के विभिन्न प्रांतों में इस अभियान में हिस्सा लिया। समाजिक ग्राम अनुभूति के द्वारा विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने गांव गांव जाकर वहां के जीवन का अनुभव लिया।