24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

OnceUponATime: मुगल सम्राट अकबर की संतान को जन्म देने वाली मरियम जमानी की कहानी, बेटे ने बनवाया था भव्य स्मारक

सिकंदरा से 500 मीटर की दूरी पर स्थित मरियम का मकबरा। मरियम मुगल सम्राट अकबर की पत्नी थी।

2 min read
Google source verification

आगरा

image

Dhirendra yadav

Dec 17, 2019

photo_2019-12-17_10-34-07.jpg

आगरा। वैसे तो आगरा की प्राचीन इमारतें खुद में कई इतिहास को समेटे हुए हैं, लेकिन कुछ इमारतें ऐसी हैं, जिनके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है। ऐसा ही भव्य स्मारक है राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर सिकंदरा से 500 मीटर की दूरी पर स्थित मरियम का मकबरा। मरियम मुगल सम्राट अकबर की पत्नी थी।

ये है कहानी
मरियम जमानी अजमेर के राजा भारमल कछवाहा की बेटी थी। उनकी शादी मुगल बादशाह अकबर से हुई थी। लंबे इंतजार के बाद जब उन्होंने अकबर के बेटे सलीम को जन्म दिया, तो अकबर ने उन्हें मरियम जमानी का खिताब दिया, जिसका अर्थ होता है-विश्व के लिए दयालु। बाद में यही सलीम जहांगीर के नाम से जाना गया। मरियम जमानी का निधन 1623 में आगरा में हुआ और उसके बेटे जहांगीर ने उनके लिए एक समाधि का निर्माण करवाया। यह सिकंदरा स्थित उनके पिता अकबर की समाधि के पास ही स्थित है। इस समाधि का निर्माण 1623 से 1627 के बीच चार साल में पूरा हुआ। यह वर्गाकार समाधि एक बाग में स्थित है और इसके मध्य में दो गलियारे हैं। इस मकबरे की छत मेहराबदार है और इसका निर्माण एक बड़े से वृतखंड पर किया गया है, जो एक बड़े से खंभे पर टिका हुआ है। इसका निर्माण ईट और संगमरमर के चूने से किया गया है। इसके चारों कोणो पर मौजूद चार बड़ी-बड़ी छतरियां इसकी शोभा और बढ़ा देती है। मुगल वास्तुशिल्प शैली में बना यह मकबरा ‘बिना गुंबद के मकबरा’ का एक बेहतरीन नमूना है।

हरियाली से घिरा है यह मकबरा
पुरातत्व विभाग के अुनसार यह लोदी काल की एक बारहदरी है। मुगलों ने इसे अपनाकर इसमें मकबरा बना दिया। इसके केन्द्रीय कक्ष के नीचे एक तहखाना बनाया गया। इमारत के चारों मुखारों को लाल पत्थर के उत्कीर्ण फलकों और छज्जों से बनाया गया है। चारों कोनों पर दुछतियां बनाई गई हैं। यह मकबरा चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है। यह पूरी इमारत नौ भागों में बांटी गई है। चारों दिशाओं में गलियारे हैं। इस मकबरे में तीन कब्रे हैं। एक तहखाने में स्थित मूलकब्र है, बाकी की दो कब्रें प्रतीकात्मक हैं, जो ऊपरी भूमितल और छत पर हैं।

गुम्बद विहीन मकबरों में इसका विशिष्ट स्थान
इस इमारत के अंदरूनी हिस्सों और बाहरी छज्जों को संभालने के लिए सुंदर मदलों का प्रयोग किया गया है। प्रत्येक खम्भे पर पांच मदले हैं, इस प्रकार एक छतरी पर 40 मदले सजाए गए हैं, जो देखने में बडे ही अद्भुत हैं। यह इमारत बिना गुम्बद के भी स्वंय में पूर्ण है। इस मकबरे का मुगलों के गुम्बद विहीन मकबरों में विशिष्ट स्थान है।