
sanjali
आगरा। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत से जंग करते हुए दसवीं की दलित छात्रा संजलि हार गई और उसने सुबह अस्पताल में दम तोड़ दिया। बता दें कि 18 दिसंबर स्कूल से लौटते समय दो बाइक सवार लोगों ने उस पर पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया था। संजलि को गंभीर अवस्था में पहले आगरा के एसएन मेडिलकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, फिर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया गया था। गुरुवार सुबह संजलि ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं पुलिस अब तक उसके आरोपियों का भी पता नहीं लगा सकी है। संजलि की मौत की खबर से उसके गांव लालऊ में मातम पसर गया है। वहीं आगरा की महिलाओं के अंदर काफी गुस्सा है।
इस मामले में महिला शांति सेना की अध्यक्ष डॉ. वत्सला प्रभाकर का कहना है कि ऐसी घटनाएं शहर में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं। सशक्त हो रही बेटियों के दिल में कहीं न कहीं असुरक्षा का भाव पैदा कर उन्हें कमजोर बनाती हैं। बेकसूर संजलि को कुछ दरिंदे अचानक दर्दनाक मौत दे जाते हैं, और पुलिस अब तक उसके आरोपियों का भी पता नहीं लगा पायी। ऐसी घटनाएं ये वाकई काफी दुखद है। इस मामले को लेकर डॉ. वत्सला प्रभाकर ने डीआईजी से मुलाकात की है। डीआईजी ने उन्हें जल्द ही आरोपियों को पकड़ने का भरोसा दिलाया है।
आराधना लेखिका मंच की अध्यक्ष डॉ. हृदेश चौधरी का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून का बनना बहुत जरूरी है और सिर्फ कानून बनाने से ही काम नहीं चलेगा, उन पर कड़ाई से अमल भी होना चाहिए। ये वाकई दुखद है कि हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल दूर होती है। यूपी में जब भाजपा सरकार आयी थी तो एंटी रोमियो स्क्वायड बनाया था, लेकिन अब कहां गया एंटी रोमियो स्क्वायड? यदि इन घटनाओं को कड़ाई से रोका नहीं गया तो महिलाओं का घर से अकेले निकलना भी मुश्किल हो जाएगा और ऐसे ही किसी न किसी निर्दोष बेटी को अपनी जान गंवानी पड़ेगी।
Published on:
20 Dec 2018 01:16 pm
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