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उत्तराखंड में आग के बाद वन क्षेत्र से सटे इलाकों में दहशत

उत्तराखंड के वनों में लगी आग की तपिश आगरा तक दिख रही है। वन क्षेत्र से सटे इलाकों में दहशत है।

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Bhanu Pratap Singh

May 03, 2016

Fire in Agra

Fire in Agra

आगरा।
उत्तराखंड के वन क्षेत्र को आग ने घेरा हुआ है। आग पर काबू पाने के यदि वहां पुख्ता इंतजाम होते, तो शायद आग इतना बड़ा रूप धारण नहीं करती। आगरा की बात करें, तो यहां भी वन विभाग के पास आग पर काबू पाने का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। कीठम के जंगल में लगी आग भले ही कुछ घंटों की रही, लेकिन उसने सैकड़ों जीवों की जान ले ली। छोटी सी आग पर नियंत्रण पाने में सभी के पीसने छूटे, तो उन क्षेत्रों का क्या, जो चारों ओर से घने जंगल से घिरे हुये हैं।


ऐसे गांव जहां आग से सहमे ग्रामीण

बाह गांव के लाखन सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र के कुछ ऐसे गांव हैं, जहां के ग्रामीण हमेशा जंगल की आग से दहशत में रहते हैं। इनमें थाना पिनाहट का गांव वित्रावली, थाना जैतपुर का गांव नाहटोली, थाना खेड़ा राठौर का गांव गोहरा, गांव मितावली सहित एक दर्जन ऐसे गांव हैं, जो चंबल सैंचुरी और यमुना किनारे के घने जंगलों से घिरे हुये हैं। इन जंगलों में गर्मी के सीजन में कब आग लग जाये, पता ही नहीं रहता है। आग की दहशत हमेशा ग्रामीणों में रहती है।


वन विभाग के पास नहीं इंतजाम

आग बुझाने के लिए वन विभाग के पास कोई पर्याप्त साधन नहीं है। रात के समय जब आग की लपटें जंगलों से उठती हैं, तो ग्रामीणों को ही सतर्क होना पड़ता है। वन विभाग की टीम को जानकारी दी भी जाये, तो कुछ वनकर्मियों की टीम आती है, वो भी आग बुझाने के किसी भी संसाधन के बगैर। इसके बाद ग्रामीण को ही मोर्चा संभालना पड़ता है।


इसलिये लगती जंगल में आग

आग हमेशा ऐसी जगह लगती है, जहां घनी झाड़ियां होती हैं। आग लगने का कारण है पेड़ों का आपस में टकराना। इससे निकलने वाली चिंगारी से आग जंगल के सूखे खरपतवार में लग जाती है। इसके अलाव दूसरा मुख्य कारण राहगीरों द्वारा जलती हुई बीड़ी सिगरेट फेंक देना भी एक बड़ा कारण है। इसकी चिंगारी से भी कई बार जंगल धधक उठते हैं।


फायरब्रिगेड का काम भी सीमित

चीफ फायर आॅफीसर आगरा जसवीर सिंह ने बताया कि पर्याप्त दमकल हैं। पानी की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन जंगल में लगी आग पर काबू पाना टेढ़ी खीर होती है। कारण है घने एरिया में दमकल आग वाले स्थान तक पहुंच नहीं पाती हैं। जितनी भी बौछार की जाती है, वो दूर से ही हो पाती है। इसके अलावा फायर ब्रिगेड की जो पेट्रोलिंग बाइक हैं, उनकी टंकियों में इतना पानी नहीं आता है, कि वे इस आग पर काबू पा सकें। अभी कीठम में जब आग लगी थी, तो उस पर आसानी से आठ दमकलों ने काबू पा लिया था, कारण था की गाड़ियां आग लगने के स्थान तक आसानी से पहुंच गईं थीं।


यहां है वनीय क्षेत्र

मुख्य वन संरक्षक विष्णु सिंह ने बताया कि आगरा के वनीय क्षेत्र में इतनी भीषण आग नहीं लग सकती है, क्योंकि यहा पर जंगल बहुत अधिक क्षेत्र में नहीं है। किरावली, जैतपुर, बाह, पिनाहट, खेड़ा राठौर में वनीय क्षेत्र हैं। जरा सी आग लगने पर उस पर आसानी से काबू पा लिया जाता है। पौधारोपण के समय भी इस बात का ध्यान रखा जाता है, कि पेड़ आपस में बहुत अधिक सटे न हों।

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