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कहीं आपके घर में भी तो ‘आनंदी’ नहीं

प्रत्यूषा बनर्जी उर्फ आनंदी जिस डिप्रेशन को अपने अंदर पाले हुई थी, उसमें जरूरत थी उसे सहारे की। इस प्रकार के डिप्रेशन को आसानी से पहचाना जा सकता है। यदि आपके घर का कोई सदस्य परेशान है, तो उसे पहचानें।

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Bhanu Pratap Singh

Apr 02, 2016

आगरा. प्रसिद्ध धारावाहिक बालिका वधू में आनंदी का किरदार निभाने वाली प्रत्यूषा बनर्जी के परिजन और मित्र थोड़ा सा ध्यान देते तो वह हम सभी के बीच होती। प्रत्यूषा जिस डिप्रेशन को अपने अंदर पाले हुई थी, उसमें जरूरत थी उसे सहारे की। इस प्रकार के डिप्रेशन को आसानी से पहचाना जा सकता है। यदि आपके घर का कोई सदस्य परेशान है, तो उसे पहचानें, जिससे कोई और आनंदी की तरह अपना जीवन समाप्त न करे।

तीन रीजन, जो धकेलते हैं आत्महत्या की ओर
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि जब लोग अपने क्लाइमैक्स पर होते हैं और फिर उन्हें काम नहीं मिलता है, तो वे अपने प्रजेंट स्टेटस को सहन नहीं कर पाते हैं और हताश हो जाते हैं। दूसरा कारण है पर्सनल रिलेशन बिगड़ते हैं, तो कुछ लोग बहुत जल्दी उसे अपने दिल में बसा लेते हैं और तीसरा कारण है जब लोग परेशान होते हैं और उन्हें सोशल सपोर्ट नहीं मिल पाता है, तो वे ऐसे आत्मघाती कदमों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।


आसानी से हो सकती है पहचान
यदि कोई डिप्रेशन में है, तो उसकी पहचान आसानी से हो सकती है। यह पहचान उसके परिवार वाले या फ्रेंड सर्किल के लोग ही कर सकते हैं। क्योंकि ये वे लोग होते हैं, जो सबसे अधिक समय इनके साथ व्यतीत करते हैं। डिप्रेशन एकसाथ घर नहीं बनाता है। इसके लक्षण धीमे-धीमे दिखाई देते हैं। जैसे व्यवहार में परिवर्तन आना, अपने आप में खोये रहना, किसी से बात न करना। यदि यह चेंज हो तो समझ जायें, कि कुछ बात है। ऐसे में मेडिकल सलाह की बहुत जरूरत हो जाती है।


सीवियर डिप्रेशन से जाती है जान
मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि छोटी छोटी बातों पर बहुत परेशान हो जाना। किसी बात को मन के अंदर छुपा लेने और मन ही मन घुटते रहना। एक स्टेज वह आती है, जब इसके कारण लोग सीवियर डिप्रेशन में पहुंच जाते हैं। इस कंडीशन में लोग अपना जीवन खत्म कर लेना चाहते हैं। यही हुआ प्रत्यूषा बनर्जी के साथ।


ऐसे बचें डिप्रेशन से
डॉ. गर्ग ने बताया कि डिप्रेशन से बचने के कुछ आसान उपाय हैं। अपनी बातों को अधिक से अधिक लोगों से शेयर करें। लोगों में घुलमिलकर रहें। जो भी परेशानी है, उससे अपने सबसे नजदीकी को जरूर बतायें। जो हो गया सो हो गया। चिंता करने के बजाय मनन करें। यदि ऐसा करेंगे, तो शायद इस घातक बीमारी से बचा जा सकता है।

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