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होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड उत्तर प्रदेश के सदस्य डॉ. पार्थ सारथी शर्मा करने वाले हैं बड़ा काम

-यूपी सरकार ने 40 साल बाद बनाया है Homoeopathic Medicine Board-वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं डॉ. पार्थ सारथी शर्मा, निभा रहे सामाजिक सरोकार-1993 से एक ही स्थान पर दे रहे निःशुल्क सेवा, देख चुके 14 लाख मरीज

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आगरा

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Dhirendra yadav

Sep 04, 2019

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आगरा। पत्रिका (Patrika) उत्तर प्रदेश के विशेष प्रोग्राम परसन ऑफ द वीक (Person of the Week) के इस बार मेहमान हैं होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड उत्तर प्रदेश (Homoeopathic Medicine Board Uttar Pradesh) के सदस्य डॉ. पार्थ सारथी शर्मा (Dr Parth Sarthi Sharma)। उन्होंने दुनिया में सबसे कम उम्र में सर्वाधिक मरीज देखने का रिकॉर्ड बनाया है। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड (Guinness Book of Records), लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड (Limca Book of Records), एशिया बुक, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा चुके हैं। 1998 में उन्होंने पहला रिकॉर्ड बनाया था। लंदन (London) के विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। स्वयंसेवी संस्था लीडर्स आगरा के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक सरोकारों को निभा रहे हैं। उनकी इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने Homoeopathic Medicine Board Uttar Pradesh का सदस्य बनाया है। आइए जानते हैं बोर्ड सदस्य के रूप में वे क्या करने वाले हैं।

पत्रिकाः होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड उत्तर प्रदेश के सदस्य के रूप में क्या उद्देश्य है?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः भारत में होम्योपैथिक एक मान्य चिकित्सा पद्धति है। केन्द्रीय होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद, होम्योपैथिक चिकित्सालय, महाविद्यालय और सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों के हितों की रक्षा करनी है। उनके लिए गाइड लाइन बनाने का काम करती है। कॉलेजों का निरीक्षण समय-समय पर किया जाता है ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे। इसी आधार पर मान्यता मिलती है। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिए जो भी बेहतर हो सकता है, वह होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड करता है।

पत्रिकाः होम्योपैथिक चिकित्सालयों में मरीज कम जाते हैं, क्योंकि डॉक्टर रहते नहीं हैं। इसके लिए क्या कर रहे हैं?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः मेरी नैतिक जिम्मेदारी है कि सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सक अच्छी तरह सेवाएं दें। निश्चित तौर पर कमियां रही होंगी, जिससे मरीजों की संख्या कम है। प्रयास यही है कि होम्योपैथी के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा मरीज स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करें।

पत्रिकाः इससे पहले कभी होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड का नाम सुनने में नहीं आया?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड का गठन 40 साल बाद योगी सरकार ने किया है। प्रधानमंत्री का उद्देश्य है कि नॉन एलोपैथी में जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां हैं, उन्हें ठीक से बढ़ावा मिले। इनमें हम्योपैथी के साथ आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा, योगा आदि हैं। इसके लिए अलग से आयुष मंत्रालय बना दिया है। इसीलिए बोर्ड का गठन किया गया है। पूरे अधिकार हैं।

पत्रिकाः गिनीज बुक आदि ने आपको सम्मानित किया है, तो क्या आप चिकित्सा रिकॉर्ड बनाने के लिए कर रहे हैं?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः नहीं, रिकॉर्ड बनाने के लिए मैंने कभी मरीज नहीं देखे हैं। मैंने 1993 में 23 साल की उम्र से मरीज देखने शुरू किए। 1998 में रिकॉर्ड अनजाने में बन गया। एक्सीडेंट के बाद मैं विश्राम कर रहा था। तब लोगों ने कहा कि बहुत मरीज देखे हैं। मैंने गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड लंदन को पत्र भेज दिया। उन्होंने स्वीकार कर लिया और मुझे सम्मानित किया, जो मेरे लिए गौरव की बात है। पूज्य पृथ्वीचंद जैन, चिकित्सालय जयपुर हाउस, आगरा में तब 62,481 मरीज देखे थे, जो पंजीकृत हैं। उसी क्रम में उसी स्थान पर 2019 में आज मरीज 14 लाख से अधिक हो गए हैं।

पत्रिकाः क्या आप पूज्य पृथ्वीचंद जैन, चिकित्सालय जयपुर हाउस, आगरा में निःशुल्क सेवा देते हैं?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः जी हां। वहां सेवा करते हैं।

पत्रिकाः लीडर्स आगरा के अध्यक्ष होने के नाते क्या कर रहे हैं?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः लीडर्स आगरा सामाजिक संस्था है। इसका मैं अध्यक्ष हूं। इसके माध्यम सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य को करते हैं, जो समाज को सही दिशा दे सके।

पत्रिकाः होम्योपैथी में बहुत सारे झोलाछाप भी आ गए हैं। बोर्ड क्या कर रहा है इनके खिलाफ?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः इन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रो होम्योपैथी डिग्री वाले भी होम्योपैथी की प्रैक्टिस कर रहे हैं। योग्य चिकित्सक अपने क्लीनिक पर पंजीकरण का स्टिकर चस्पा करें। जल्दी ही कार्रवाई होगी।

पत्रिकाः भ्रांतिया बहुत हैं हम्योपैथी को लेकर जैसे कि हर तरह का इलाज संभव है?
डॉ. पार्थ सारथी शर्माः होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से सभी तरह की बीमारियों का इलाज होता है। अगर कोई मरीज बहुत गंभीर है, संक्रामक रोग से ग्रसित है तो उसे एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को भी अपनाना चाहिए।