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कीटनाशक व रासायनिक खाद से हो रही किडनी खराब, मधुमेह रोगियों में बड़ी समस्या

-मिट्टी और पानी के साथ मिलकर भारी धातु शरीर में पहुंच रही -60 फीसदी मधुमेह रोगियों की किडनी खराब हो रही है

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dr Balaji

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आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित केएनसीसी में एपीकॉन 2020 के तहत देश-विदेश के 12000 चिकित्सक जटिल रोगों पर मंथन कर रहे हैं। तीसरे दिन चैन्नई के नैफ्रोलॉजिस्ट डॉ. बालाजी कृष्णनन ने बताया कि खेतों में कीटनाशक व रासायनिक खाद का प्रयोग ग्रामीणों की किड़नी खराब कर रहे है। वहां की मिट्टी और पानी में मिलकर हैवी मैटिल लोगों के शरीर में पहुंच कर किडनी पर असर डाल रहे हैं। लगभग 20-30 फीसदी ग्रामीणों में किडनी की समस्या है।

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डायबिटिक के साथ समस्या

उन्होंने बताया कि 60 फीसदी डायबिटिक रोगियों में किडनी खराब हो रही है। ब्डल शुगर किडनी की झिल्ली को डेमैज कर देती है। जिन डायबिटिक रोगियों में पैरों व चेहरे पर सूजन, खाने का मन न होना, उल्टी आना, मूत्र का रंग भूरा या लाल जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, उनके यूरिन व ब्लड टेस्ट से किडनी की जांच की जानी चाहिए। यह जांच हर डायबिटिक मरीज को करानी चाहिए।

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नए वायरस का अटैक, तैयार रहें डॉक्टर

केएनसीसी, फतेहाबाद रोड पर सजाए गए एपीकॉन सिटी में कांफ्रेंस में तीसरे दिन वायरस के अटैक पर भी चर्चा की गई। कांफ्रेंस में इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च द्वारा 2020 में जीका, निपाह और इबोला वायरस के बढते हुए खतरे, इसकी रोकथाम और इलाज के लिए डॉक्टरों को चेताया है। एपीआई के चिकित्सक भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। हॉल ए में नई बीमारियों के इलाज और रोकथाम पर चर्चा की गई। जीवनशैली से जुडे मधुमेह, ह्रदय रोग और बुजुर्गों के इलाज पर चर्चा हुई।

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