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पितृपक्ष में किस समय करें श्राद्ध जानिए ज्योतिषाचार्य से

ऐसी धर्मशास्त्रीय मान्यता है कि अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस

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आगरा

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Abhishek Saxena

Sep 05, 2017

pitru paksha

Pitru Paksha Shraddh

आगरा। पितरों को तर्पण और श्राद्ध का महीना शुरू होने वाला है। छह सितंबर को पूर्णिमा से श्राद्ध का महीना शुरू हो जाएगा। वैदिक हिंदू धर्म शास्त्रों में श्राद्ध का बहुत अधिक महत्व है। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका श्राद्ध करना जरूरी माना जाता है। तभी हमारे पूर्वज को मुक्ति, मोक्ष मिलती है। ऐसी धर्मशास्त्रीय मान्यता है कि अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है। पत्रिका ने बातचीत की भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम से उन्होंने बताया श्राद्ध कैसे करें।

इस समय तक है पूर्णिमा
वैदिक सूत्रम चेयरमैन भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि इस बार 6 सितंबर 2017 से पूर्णिमा से श्राद्ध शुरू हो रहे हैं। जो व्यक्ति अपने किसी पूर्वज का पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध करना चाहते हैं तो वह 6 सितम्बर को दोपहर 12 से 12 बजकर 34 मिनट तक अपने पूर्वज का श्राद्ध कर लें। क्योंकि उस दिन दोपहर 12 बजकर 34 मिनट के बाद प्रतिपदा तिथि आरम्भ हो जाएगी। पूर्णिमा तिथि उस दिन 12 बजकर 34 मिनट तक है। कोशिश करें पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध पूर्णिमा तिथि में ही सम्भव हो, क्योंकि दोपहर 12 बजे के बाद पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि 6 सितम्बर 2017 से ही पितृपक्ष के श्राद्ध शुरू होने के बाद 20 सितंबर को सर्वपित्री दर्श के साथ समाप्त होंगे। 20 सितम्बर को सूर्योदय में उदित अमावस्या तिथि सुबह 11 बजे तक है।

कौन कर सकते हैं श्राद्ध
पितरों को श्राद्ध कौन कौन कर सकता है, इसमें लोगों में भ्रांतियां रहती हैं। पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो सबसे बड़ा पुत्र या सबसे छोटा पुत्र श्राद्ध कर सकता है। और अगर किसी के पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान दे सकते हैं।

ये काम न करें
पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि पितृ पक्ष में कौन से काम नहीं करना चाहिए। जिसे करने से आपके पूर्वजों को तो कष्ट होगा ही साथ में आपको भी नरक की प्राप्ति होगी। ऐसा वैदिक शास्त्रों में कहा गया है। उन्होंने बताया कि अगर आपको पितरों का श्राद्ध करना है, तो इस बात का ध्य़ान रखें कि इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पूरा पालन करें। इन दिनों में मांस-मदिरा का सेवन न करें तो बेहतर है। जब तक आपके पूर्वज की तिथि का श्राद्ध न हो जाये तब तक अपनी दाढ़ी और बालों की कटिंग न कराएं। यह वैदिक शास्त्र सम्मत होता है। पितृ पक्ष के दौरान चना, मसूर, सरसों का साग, जीरा, मूली, काला नमक, लौकी, खीरा आदि नहीं खाना चाहिए। आपके पूर्वज के श्राद्ध वाली तिथि के दिन आपके पूर्वज की पसंद का पकवान किसी सात्विक ब्राह्मण को खिलाना चाहिए जो ब्राह्मण आपके निवास स्थान पर श्रद्धा पूर्वक भोजन ग्रहण करे, तभी वो आपके पितरों को लगता है अर्थात उनको सन्तुष्टि होती है।