अभियान से जुड़े समाजसेवी रंजन शर्मा का कहना है कि साल भर निरंतर वैचारिक संगोष्ठियों का आयोजन यहां होता रहा। इन संगोष्ठियों में शहर के डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, शिक्षक, पत्रकार विभिन्न पेशों से जुड़े हुए लोग, राजनेता, जनप्रतिनिधि, व्यापारी, कलाकार, सामाजिक, धार्मिक हर वर्ग के व्यक्ति समिलित हुए। यहां आए लोगों ने जहां इसे स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। वहीं इस अभियान को आम लोगों तक पहुंचा कर उन्हें जागरूक किया है। लेकिन, निरंतर इन गतिविधियों के बाद भी शासन प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। न तो यमुना में सीधे गिरते हुए नालों को ही रोका गया है न हीं इसे बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। यमुना आज भी या यो अधिकांश समय सूखी रहती है या उसमें दुर्गन्धयुक्त गंदे नाले का पानी रहता है।