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2016 में आरती होती रही, यमुना रोती रही, जानिए क्या हुआ

पूरे साल यहां आरती का सिलसिला चलता रहा।

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Abhishek Saxena

Dec 24, 2016

yamuna river agra

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आगरा। यमुना नदी आगरा सहित विभिन्न शहरों की जीवन रेखा है। आज इसकी निरंतर हो रही दुर्दशा के कारण ये महज एक नाले में परिवर्तित हो चुकी है। इस भूली हुई नदी को बचाने के लिए आगरा शहर में विगत 1 अप्रैल 2015 से समाजसेवी ब्रज खंडेलवाल के नेतृत्व में रिवर कनेक्ट नाम से एक अनूठा अभियान चलाया जा रहा है। बीते सालों में ये अभियान आगरा में लोगों को जागरूक कर रहा है। यहां रोजाना सायंकालीन आरती का सिलसिला शुरू होता है, जो 600वें दिन में प्रवेश करने वाला है। लेकिन, यमुना सफाई के लिए शासन और प्रशासन के कानों तक जूं तक नहीं रेंग सकी है। साल का अंत होने को हैं, लेकिन यमुना श़ुद्धीकरण के लिए कोई प्रयास सरकारों द्वारा नहीं किए गए हैं। पूरे साल यहां आरती का सिलसिला चलता रहा।

एक अप्रैल से शुरू हुआ था अभियान
रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्य समाजसेवी शैलेंद्र नरवार ने बताया कि 1 अप्रैल 2015 से रिवर कनेक्ट अभियान शुरू हुआ था। जो साल 2016 में निरंतर चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य शहर के लोगों को इस नदी के समीप लाना है, ताकि लोग जो आज इस महत्वपूर्ण नदी को भूल चुके हैं वे यहां आएं इसे समीप से देखें। इसके विषय में चिंतन करें, चर्चा करें और इसे गंदा न करने का संकल्प लें साथ ही इस अभियान का उद्देश्य केंद्र व राज्य सरकारों, प्रशासन पर दबाव बनाना भी है।

रोजाना होती है सांध्य आरती
अभियान के सदस्य डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत रोजाना सायं मथुराधीश मंदिर के महन्त पं. नंदन श्रोत्रिय, पं. जुगल श्रोत्रिय द्वारा यमुनाजी की आरती संपन्न होती है। इस यमुना आरती में पूरे वर्ष आगरा ही नहीं बल्कि अन्य शहरों के सभी धर्मों के लोग भी सम्मिलित हुए हैं। यमुना आरती के अवसर पर पूरे वर्ष रोजाना यमुना जी की वर्तमान दशा पर चर्चा की गई और लोगों को इसे गंदा न करने के लिए प्रेरित भी किया गया।
river conect campaign

14 जनवरी को हुई पतंगबाजी
अभियान के अंतर्गत 14 जनवरी 2016 को मकर संक्रांति के अवसर पर एक पतंग उत्सव का आयोजन किया गया जिसमें पतंगों और गुब्बारों के माध्यम से यमुना को बचाने के संदेश के साथ साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, जल ही जीवन है आपसी भाईचारा आदि महत्वपूर्ण संदेश भी दिये गए।

बच्चों ने की स्केटिंग
17 जनवरी को छोटे छोटे नन्हें बच्चों द्वारा स्केटिंग करते हुए हाथों में यमुना बचाने के संदेश के पोस्टर पकड़ कर भी लोगों से इस नदी को बचाने की अपील की गई। बच्चों द्वारा संदेश देने का क्रम अन्य महीनों में भी जारी रहा।

यमुना महोत्सव
एक वर्ष पूर्ण होने पर 1 से 3 अप्रैल 2016 को त्रिदिवसीय यमुना महोत्सव का भी आयोजन किया गया। जिनमें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नुक्कड़ नाटकों, संगोष्ठियों के माध्यम से यमुना की वर्तमान दुर्दशा पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया। शहरवासियों द्वारा रैली निकाल कर नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया गया।
etmaudula view point
यमुना महोत्सव

नाव चलाईं
17 अप्रैल 2016 को केंद्रीय मंत्री गडकरी को यमुना में नाव चलाने के वायदे को याद दिलाने के लिए नाले में परिवर्तित हो चुकी यमुना में सांकेतिक कागज की नावें भी चलाई गईं।

प्रदर्शन भी हुए
समाजसेवी ज्योति खंडेलवाल 21 अप्रैल को इसी स्थान से आगरा के इन्टरनेशनल एयरपोर्ट की मांग के लिए प्रदर्शन किया गया। 30 मई 2016 को दशहरा से पूर्व सूखी यमुना में पानी प्रवाहित किया जाए, इसके लिए शहरवासियों द्वार सामूहिक रेत स्नान कर शासन और प्रसासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया। यमुना के पूरे इतिहास, इसके प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए समाजसेवी शैलेन्द्र नरवार द्वारा डॉक्यूमेंटरी सेव यमुना का भी निर्माण किया गया। कई माध्यमों से इसका इसका प्रसारण कर लोगों को जागरूक भी किया गया।

डॉक्टर्स, इंजीनियर, शिक्षक जुड़े
अभियान से जुड़े समाजसेवी रंजन शर्मा का कहना है कि साल भर निरंतर वैचारिक संगोष्ठियों का आयोजन यहां होता रहा। इन संगोष्ठियों में शहर के डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, शिक्षक, पत्रकार विभिन्न पेशों से जुड़े हुए लोग, राजनेता, जनप्रतिनिधि, व्यापारी, कलाकार, सामाजिक, धार्मिक हर वर्ग के व्यक्ति समिलित हुए। यहां आए लोगों ने जहां इसे स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। वहीं इस अभियान को आम लोगों तक पहुंचा कर उन्हें जागरूक किया है। लेकिन, निरंतर इन गतिविधियों के बाद भी शासन प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। न तो यमुना में सीधे गिरते हुए नालों को ही रोका गया है न हीं इसे बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। यमुना आज भी या यो अधिकांश समय सूखी रहती है या उसमें दुर्गन्धयुक्त गंदे नाले का पानी रहता है।

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