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जब हालात झुके हौसले के आगे! जानें पैरों से इतिहास रचने वाले गौकरण पाटिल की कहानी

Feet Painting: भिलाई के 45 वर्षीय गौकरण पाटिल ने बिना हाथों और सुनने-बोलने की क्षमता के भी पैरों से पेंटिंग कर अपनी पहचान बनाई।

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पैरों से पेंटिंग (photo source- Patrika)

पैरों से पेंटिंग (photo source- Patrika)

Feet Painting: 'हाथ नहीं हैं। बोलने और सुनने की शक्ति भी नहीं। लेकिन हौसले इतने मजबूत कि हालात खुद रास्ता छोड़ दें' यह कहानी है छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में रहने वाले 45 वर्षीय गौकरण पाटिल की—एक ऐसे कलाकार की, जिसने समाज की तय की हुई सीमाओं को तोड़ते हुए यह साबित कर दिया कि किस्मत लिखने के लिए हाथों की नहीं, हौसले की ज़रूरत होती है।

बचपन से संघर्ष की शुरुआत

गौकरण पाटिल जन्म से ही दिव्यांग थे। बचपन से ही उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ था। उनके हाथ नहीं थे, न बोल सकते थे, न सुन सकते थे। समाज अक्सर ऐसे हालात को बेबसी से देखता है, लेकिन गौकरण ने बहुत कम उम्र में ही तय कर लिया था कि वह अपनी कमियों को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने देंगे।

जब दूसरे बच्चे स्कूल में किताबें पकड़ने और स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने में बिज़ी थे, गौकरण अपनी दुनिया बनाने में बिज़ी थे। उनके परिवार ने उन्हें कभी बोझ नहीं समझा, बल्कि उनकी हिम्मत बढ़ाई। यही हिम्मत आगे चलकर उनकी पहचान बन गई।

8 साल की उम्र में शुरू हुआ रंगों का सफर

गौकरण ने सिर्फ़ 8 साल की उम्र में पेंटिंग की दुनिया में कदम रखा था। जहाँ आम लोग ब्रश को हाथों से पकड़ते हैं, वहीं गौकरण ने इसे अपने पैरों से पकड़ा। धीरे-धीरे उनके पैर उनके हाथ बन गए। ब्रश, पेंट और कैनवस—सब कुछ उनके पैरों के इशारे पर चलता है। उनकी पेंटिंग्स में सिर्फ़ रंग ही नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्म-सम्मान और अदम्य साहस की कहानियाँ भी हैं। उनकी कला सिखाती है कि कला किसी शरीर पर निर्भर नहीं होती; यह आत्मा से पैदा होती है।

आत्मनिर्भरता की मिसाल

गौकरण पाटिल सिर्फ़ एक आर्टिस्ट नहीं हैं; वे आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल हैं। चाहे खाना हो, कपड़े पहनने हों, या रोज़ के काम करने हों, वे हर काम अपने पैरों से करते हैं। उन्होंने कभी किसी पर निर्भर रहना नहीं माना। उनकी ज़िंदगी यह संदेश देती है कि विकलांगता कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक अनोखी ताकत है। इस पूरे सफ़र में, उनके छोटे भाई, नरेंद्र कुमार, हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे हैं। उनके भाई का सपोर्ट और परिवार का भरोसा गौकरण की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।

देशभर में मिली पहचान

गौकरण की कला धीरे-धीरे भिलाई से पूरे देश में फैल गई। उनकी पेंटिंग्स कई बड़े प्लेटफॉर्म और जानी-मानी हस्तियों तक पहुंचीं। उन्होंने मेगास्टार अमिताभ बच्चन की एक पेंटिंग भी बनाई थी, जिसे उन्होंने खुद मुंबई में उन्हें गिफ्ट किया था। इस मुलाकात ने न सिर्फ उन्हें नई पहचान दिलाई बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अगर सपने सच्चे हों, तो कोई भी दूरी बड़ी नहीं होती।

राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा हौसले का सफर

गौकरण पाटिल की ज़िंदगी का सबसे गर्व का पल तब आया जब उन्हें 26 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन बुलाया। वे राष्ट्रपति के साथ डिनर में शामिल होंगे। यह सम्मान सिर्फ़ एक कलाकार का नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मनिर्भरता और हिम्मत का है। पहले भी एक इवेंट के दौरान राष्ट्रपति से उनकी इनफॉर्मल मीटिंग हो चुकी है, लेकिन अब देश का सबसे बड़ा मंच उनकी हिम्मत को सलाम करने जा रहा है।

समाज के लिए एक मजबूत संदेश

भिलाई के गौकरण पाटिल की कहानी सिर्फ़ प्रेरणा देने वाली ही नहीं है, बल्कि यह समाज को आईना दिखाती है। यह दिखाती है कि "हालात कैसे भी हों, अगर इंसान ठान ले, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो सकता है।" गौकरण आज हज़ारों लोगों के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और पॉज़िटिव सोच की पहचान बन गए हैं।

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