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आगरा। साइबर फ्रॉड की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पुष्पांजलि हॉस्पीटल के डायरेक्टर के एकाउंट से शातिरों ने 98.70 लाख रुपये निकाल लिए हैं। आयकर विभाग द्वारा सीज खाते से कैश शातिर ने पहले बैंक खाते में ट्रांसफर कराया। दूसरे दिन बैंक आकर अपने खाते से कैश निकाल ले गया। साइबर सैल ने जांच शुरू कर दी है। हॉस्पीटल के डायरेक्टर ने बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
ये है मामला
आगरा के पुष्पांजलि ग्रुप के डायरेक्टर मयंक अग्रवाल का एचडीएफसी बैंक में एकाउंट है। एकाउंट में 1.06 करोड़ के कैश था। आयकर विभाग द्वारा खाता अटैच किया गया था। उसका संचालन बिना आयकर की अनुमति के नहीं हो सकता था। वह एसएमएस अलर्ट सेवा से जुड़े थे। दो फरवरी को नेट बैकिंग से बैलेंस चेक किया, तो उनके होश उड़ गए। खातें में दो लाख के आस पास कैशा था। जांच में पता चला कि 17 जनवरी को धर्मेन्द्र सिंह ने बैंक में फर्जी साइन से वाउचर के जरिए उनके सीज खाते से पैसा दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया है।
इस तरह हुआ फ्रॉड
इसी बैंक में धर्मेंद्र सिंह नाम के व्यति का एकाउंट है। उसने बैंक में मयंक अग्रवाल के एकाउंट का केवाईसी जमा किया। इसमें मोबाइल नंबर मयंक अग्रवाल की जगह धर्मेंद्र सिंह ने अपना दर्ज कर दिया। धर्मेंद्र सिंह ने मयंक अग्रवाल के एकाउंट से ऑनलाइन बैंकिंग से 98.70 लाख रुपये अपने एकाउंट में ट्रांसफर कर लिए। इसके लिए भेज गया ओटीपी धर्मेंद्र सिंह के मोबाइल पर आया। इससे इतनी बड़ी अमाउंट खाते से निकले के बाद भी पता नहीं चला।
एकाउंट कर दिया खाली
मयंक अग्रवाल के एकाउंट से 98.70 लाख ट्रांसफर करने के बाद धर्मेंद्र सिंह ने 17 और 18 जनवरी को यह रकम बैंक से निकाली गयी। अपने एकाउंट को खाली कर दिया। 19 जनवरी को यह कहते हुए बैंक से अपने खाते से विड्रॉल कर लिया कि उनको जमीन की खरीदारी करनी है। मयंक अग्रवाल ने अपने साथ हुए फ्रॉड की शिकायत एसएसपी अमित पाठक से की। एसएसपी के निर्देश पर साइबर सेल की टीम शनिवार को जांच के लिए बैंक में पहुंची। शातिर के सीसीटीवी फुटेज निकाले जा रहे हैं।
आयकर विभाग से सीज था खाता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मयंक अग्रवाल के अधिवक्ता रवि गुप्ता ने बताया कि जिस खाते से रकम उड़ाई गई है उसका संचालक पिछले एक साल से अधिक समय से बंद था। आयकर विभाग ने उसे सीज कर रखा था। खाते के संचालक के लिए आयकर विभाग की अनुमति चाहिए थी। बिना अनुमति खाते से पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। जिस खाते में पैसा ट्रांसफर हुआ था उसे खाली कर दिया गया। बिना बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के यह संभव ही नहीं है। इसलिए मुकदमे में बैंक स्टाफ पर भी शक जाहिर किया गया है।
Published on:
04 Feb 2018 09:21 am
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