
आगरा में कब्जा हटाने गई टीम पर पथराव करते सत्संग सभा के अनुयायी।
Radha Soami Satsang Sabha in Agra: 24 सितंबर यानी रविवार को आगरा के दयालबाग स्थित राधा स्वामी सत्संग सभा के अवैध कब्जे को हटाने पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम पर लोगों ने हमला कर दिया। सत्संगी लाठी-डंडे लेकर पुलिस के सामने आ गए और कुछ ने पथराव कर दिया। इससे मौके पर भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाकर भागने लगे। सत्संगी बुरी तरह से पुलिस टीम पर टूट पड़े। पुलिस जब तक बल प्रयोग करती तब तक सत्संगी लाठियां बरसानी शुरू कर चुके थे। सत्संगियों के हमले में एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए है। इसके बाद से इलाके में तनाव बरकरार है।
मथुरा के जवाहरबाग में भी प्रशासन की टीम पर हुआ था हमला
2 जून 2016 को मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी पुलिस के साथ जवाहर बाग में कब्जा जमाकर बैठे बाबा जयगुरुदेव के अनुयायी रामवृक्ष यादव को समझाने गए। इस दौरान उन्होंने जवाहरबाग क्षेत्र खाली करने को कहा। इससे रामवृक्ष यादव के समर्थक उग्र हो गए। उन्होंने प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया। इस हमले में रामवृक्ष यादव और उसके आदमियों ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और तत्कालीन एसओ फरह संतोष कुमार यादव की जान ले ली। इस हिंसा में 27 कब्जाधारी मारे गए। एक शव को रामवृक्ष यादव का बताया गया। थाना सदर बाजार में पुलिस ने हत्याकांड के दर्ज कराए मुकदमा 102 लोग आरोपित बनाए और जिला जज की कोर्ट आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इससे पहले कब्जाधारियों के खिलाफ 29 मुकदमे थाना सदर बाजार में दर्ज हुए थे।
दयालबाग में भी राधास्वामी सत्संग सभा का खेतों-चकरोड पर कब्जा
कुछ इसी तरह आगरा के दयालबाग में खेतों, चकरोड पर कब्जा करने के मामले में राधास्वामी सत्संग सभा के खिलाफ 113 साल में पहली बार प्रशासन का बुलडोजर चला है। सत्संग सभा ने 1949 से लेकर अब तक हर बार जमीन के विवाद में प्रशासन को उनके खेतों पर फटकने नहीं दिया। पहली बार 6 गेटों के टूटने के साथ सत्संगियों का गुस्सा भड़क गया। अवैध कब्जा हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर सत्संगियों ने हमला कर दिया।
सत्संगी लाठी-डंडे लेकर पुलिस के सामने आ गए और कुछ ने पथराव कर दिया। इससे मौके पर भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाकर भागने लगे। सत्संगी बुरी तरह से पुलिस टीम पर टूट पड़े। वहीं पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महज एक सप्ताह में राधास्वामी सत्संग सभा के खिलाफ 3 एफआईआर हुई हैं। वहीं सत्संग सभा के अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष के खिलाफ भूमाफिया घोषित करने की सिफारिश तहसील से की जा चुकी है। शनिवार को दर्ज कराई गई एफआईआर में भी सत्संग सभा के कार्यों को भूमाफिया प्रकृति का बताया गया है।
जवाहर बाग में ऐसे ही किया गया था कब्जा
मार्च 2014 में मध्य प्रदेश के सागर जिले से दिल्ली के लिए 1500-1600 आदमियों के साथ चले स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के स्वयंभू अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव ने प्रशासन से जवाहर बाग में दो दिन ठहरने की अनुमति ली थी। अनुमति मिलने के बाद इन लोगों ने भारत के लोगों की नागरिकता, संविधान बदलने और एक रुपए में 60 लीटर डीजल, पेट्रोल देने की मांग को लेकर इन लोगों ने सत्याग्रह शुरू किया और फिर दो साल तक कब्जा जमाकर बैठ गए।
राम वृक्ष यादव के नेतृत्व में इन लोगों ने जवाहर बाग उद्यान पर कब्जा कर लिया और रामवृक्ष यादव अपनी समांतर सत्ता स्थापित कर ली। रामवृक्ष यादव बाबा जय गुरुदेव का अनुयायी था। मथुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय पाल तोमर ने हाई कोर्ट जनहित याचिका दाखिल कर जवाहर बाग को खाली करने की मांग। हाईकोर्ट के जिला प्रशासन को उद्यान खाली कराने के आदेश दिए।
आगरा में सत्संगियों का पूरा शासन अलग
रविवार को हुए बवाल के बाद आगरा में सत्संग सभा ने जिले के कई प्रतिष्ठित अखबार नहीं लेने का आह्वान किया है। हालांकि पुलिस अधिकारी भी अब चौकन्ने होकर फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। सोमवार को डीसीपी कार्यालय पहुंची महिला ने बताया कि सत्संगियों द्वारा आगरा से प्रकाशित होने वाले तीन चार अखबारों को न लेने की बात कही गई है। उसने बताया कि सत्संग सभा का पूरे दयालबाग क्षेत्र में अलग ही शासन चलता है। पुलिस अधिकारी मामले की जांच पड़ताल के लिए टीम बनाने की बात कर रहे हैं। महिलाओं को हमला करने के लिए आगे की टुकड़ी में रखा जाता है जिससे कोई उन पर हमलावर ना हो सके अगर कोई विरोध करता है उसे कैंप के अंदर ले जाते हैं और उसकी हत्या कर देते हैं। महिला द्वारा लगाई गई आरोपी की अगर जांच की जाए तो शायद कुछ खुलासा हो सकता है मथुरा जैसा कांड इस दयालबाग में भी निकाल कर आ सकता है।
जवाहर बाग में भी रामवृक्ष यादव चलाता था समानांतर सरकार
जवाहर बाग की जमीन पर अपना डेरा तंबू तानकर रामवृक्ष यादव ने अपने आप को दो साल में इतना मजबूत कर लिया कि वह समानांतर सरकार चलाने लगा। आनुषांगिक संगठन गठित कर लिए। बाग में गुरिल्ला युद्ध की ट्रेंनिग कैंप तक चलाए गए। हथियार भी एकत्र कर लिए गए। राशन की कमी नहीं थी। यहां तक कि जवाहर बाग के गेट से बाहर आकर मुख्य सड़क पर भी अपने झंडे गाड़ दिए और लकड़ी का गेट बना दिया। जब भी अधिकारी बातचीत करने गए, उनको बंधक बना लिया गया। उनके साथ अभद्रता की गई। उसके बाद भी रामवृक्ष यादव और उनके आदमियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका।
Updated on:
25 Sept 2023 10:11 pm
Published on:
25 Sept 2023 10:08 pm
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