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आगरा। डेढ़ सौ वर्ष पहले आगरा (Agra) से शुरू हुआ था राधास्वामी (Radhasoami) मत। देश-विदेश में राधास्वामी मत के लाखों अनुयायी हैं। राधास्वामी मत का आदि केन्द्र हजूरी भवन (Hazuri Bhawan), पीपल मंडी आगरा में है। यहां बड़ी संख्या में चीन (China) से श्रद्धालु आ रहे हैं। स्वयं सतसंगियों को इस पर अचरज हो रहा है।
बने गए शाकाहारी
राधास्वामी मत के वर्तमान आचार्य और आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अगम प्रसाद माथुर (Prof Agam Prasad mathur ( दादाजी महाराज) से मिलने के लिए बड़ी संख्या में चीन से श्रद्धालु आए हैं। इनमें महिलाए भी शामिल हैं। उन्होंने एक पुस्तक पढ़ी, जिससे राधास्वामी मत के प्रति प्रेरित हुए। श्रद्धा में इस कदर डूबे हुए हैं कि वे खुद का धर्म राधास्वामी बताने लगे हैं। मांसाहार भी छोड़ दिया है। पूरी तरह से शाकाहारी बन गए हैं। चीन में मुख्य भोजन सी फूड (समुद्री जीव-जंतु) है।
यह चमत्कार कैसे हुआ
आखिर यह चमत्कार कैसे हुआ, इस बारे में राधास्वामी मत के वर्तमान आचार्य दादाजी महाराज (Dadaji maharaj) कहते हैं कि जिसने राधास्वामी नाम का सुमिरन कर लिया, उस पर दातार की बड़ी कृपा होती है। राधास्वामी मत की यह विशेषता है कि किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाता है। जिसके मन में राधास्वामी के प्रति प्रेम और श्रद्धा का भाव उत्पन्न होता है, वह मत का अनुयायी हो जाता है। हमारे कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना होता है।
गुरु में श्रद्धा जरूरी
दादाजी महाराज का कहना है कि राधास्वामी मत संसार को प्रेम का संदेश देता है। प्रेम से सबकुछ पाया जा सकता है। राधास्वामी मत गुरु परंपरा का वाहक है। गुरु में श्रद्धा जरूरी है। हजूरी भवन में हजूर महाराज साक्षात विराजमान हैं। उनकी शरण में आने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है।
कोई कष्ट नहीं होता
दादाजी महाराज ने कहा कि सत्संगी को इहलोक में कोई कष्ट नहीं होता है। वह सारे कष्टों पर पार पा जाता है। राधास्वामी नाम का सुमिरन करते रहने से आध्यात्मिकता बढ़ती है। आंतरिक चेतना बढ़ती है।
Updated on:
25 Oct 2019 12:03 pm
Published on:
25 Oct 2019 11:14 am
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