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राधास्वामी मत के गुरु दादाजी महाराज के महिलाओं के बारे में विचार सुनकर चौंक जाएंगे

राधास्वामी मत के गुरु दादाजी महाराज (प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर) महिलाओं की प्रगति के साथ-साथ नारीत्व की गरिमा बनाए रखे के भी समर्थक हैं।

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dadaji maharaj

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आगरा। राधास्वामी मत के गुरु दादाजी महाराज (प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर) ने महिलाओं के बारे में खुलकर विचार रखे हैं। उन्होंने महिलाओं की आजादी की जमकर वकालत की है। उन्होंने नारी की दुर्दशा और उत्पीड़न का प्रतिकार किया है। वे महिलाओं की प्रगति के साथ-साथ नारीत्व की गरिमा बनाए रखे के भी समर्थक हैं। प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर आगरा विश्वविद्यालय के दो बार कुलपति रहे हैं, जो कि एक रिकॉर्ड है। राधास्वामी मत परंपरा और दादाजी महाराज पुस्तक के लेखकर डॉ. अमी आधार निडर बताते हैं कि दादाजी महाराज महिलाओं के उत्थान के साथ मातृत्व भाव सुरक्षित रखने के पक्षधर हैं। ताजमहल के शहर आगरा राधास्वामी मत के सत्संगियों के लिए महिला सम्मान के लिए कई हुक्म जारी किए हैं। दादाजी महाराज के वचनों का ही प्रभाव है कि हजूरी भवन पीपलमंडी में नित्य होने वाले सत्संग में महिलाओं की संख्या अधिक होती है। आइए जानते हैं दादाजी महाराज ने महिलाओं के बारे में क्या कहा है-

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1.महिलाएं आरक्षण द्वारा संसद औऱ विधानसभा में जाने का उपक्रम करने के बजाय अपने मातृत्वभाव को सुरक्षित रखने का प्रयास करें।

2.महिलाएं केवल डिग्री पाने के लिए नहीं बल्कि व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए अध्यन करें ताकि वे आत्मनिर्भर हो सकें और विपत्ति के समय उन्हें किसी अन्य आश्रय की तलाश न करनी पड़े। आत्मनिर्भरता से महिलाओं को नई दिशा मिलेगी।

3.चौंकाने वली बात ये है कि आज भी अधिकांश महिला आबादी महिला आंदोलन के प्रभाव से अछूती है।

4.ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाएं आज भी अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं।

5.महिला आंदोलन दिशाभ्रम का शिकार है औ 100 साल के बाद भी पूरे देश की अधिसंख्य महिलाओं से अछूता है।

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6.एक सदी पूरी होने के बाद भी महिला आंदोलन का लाभ विशिष्ट वर्ग की महिला नेत्रियों तक ही सीमित है। इसका लाभ अधिसंख्य भारतीय महिलाओं तक नहीं पहुंच सका है।

7.महिला आंदोलन विशिष्ट महिलाओं के आंदोलन मे तब्दील हो गया है, जिसने पश्चिम से तो बहुत कुछ ले लिया है, लेकिन हम भूल गए हैं कि पूरब में भी बहुत कुछ अच्छा था।

8.भारतीय महिला आंदोलन की इसी भटकन ने भारतीय समाज में मूल्यों का संकट पैदा कर दिया है। इसी का परिणाम है कि संयुक्त भारतीय समाज आज डूबने के कगार पर है।

9.राधास्वामी दयाल का सख्त हुक्म है कि कोई भी अपने घर में महिलाओं के संग बुरा व्यवहार न करे।

10.औरतों को अपनी जुबान पर और पुरुषों को अपने हाथ पर काबू करना होगा।

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11.कानून ने स्त्री और पुरुष को बराबर अधिकार दे दिए हैं। आज भारतीय नारी का संपत्ति में भी अधिकार है। अपना वर स्वयं पसंद कर सकती है। आधुनिकता आ गई है, पर उसका अभी भी पूरे तौर पर शोषण खत्म नहीं हुआ है। अब भी ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के साथ बरताव ठीक नहीं होता है। मारपीट उनके साथ अब भी होती है।

12. नारी ही नारी के प्रति कटुता, द्वेष और शत्रुतापूर्ण व्यवहार की पहल करती है। इस कटुता का लाभ पुरुष उठा लेता है।

13.शकुन और अपशकुन की बात महिलाओ के दिल में अधिक गूंजती है, बनिस्पत मर्दों के।

14.नई बहू घर में आती है और अगर वह पूरा दहेज नहीं लाती है तो मर्द तो बाद में ताना कसता है, उससे पहले महिलाएं ही उसका शोषण कर लेती हैं और बड़ी भारी योजनाएं उसको खत्म करने की बनाती हैं।

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