
आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन में आए आरबीआई डायरेक्टर सतीश मराठे ने कहा कि आज के सत्र का विषय 1969 - 70 के कलकत्ता अधिवेशन का स्मरण कराता है। जिसमें हमने इस विषय की भी चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि देश में बनाया जा रहा विकट आर्थिक समस्याओं का माहौल सत्य नहीं है। वर्तमान में थोड़ी अस्थाई आर्थिक मंदी का दौर हो सकता है, पर उसे नकारात्मक वातावरण उत्पन्न करना उचित नहीं। भारत का वर्तमान वित्तीय घाटा बिल्कुल भी चिंता का विषय नहीं, यह ज़रूर था कि कुछ समय के लिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई थी परंतु अभी सुधार करते हुए वापस 442 अरब डॉलर कुछ हो चुका है।
महंगाई की दर में हुई नाम मात्र की वृद्धि
उन्होंने कहा कि महंगाई की दर में भी नाम मात्र की ही वृद्धि हुई है जिसका सबसे बड़ा घटक प्याज के बढ़ते हुए मूल्य हैं, परंतु वह भी अगले एक-दो महीने में नीचे आ जाने के आसार हैं उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापार और नीति का समय अनुकूल पूर्ण मूल्यांकन करते रहना चाहिए। उत्पादन क्षेत्र की समस्याओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 2014 के उपरांत उत्पादन क्षेत्र में छोटे-छोटे सुधार किए गए हैं लेकिन इंडिया जैसे कार्यक्रमों का भी इसमें काफी बड़ा योगदान है। उत्पादन क्षेत्र में मंदी का प्रमुख कारण उद्योगों का चतुर्थ क्रांति की आवश्यकता हेतु तैयार नहीं होना है।
श्रम कानून संबंधी सुधारों की आवश्यकता
उत्पादन क्षेत्र में सुधार हेतु श्रम कानून संबंधी सुधारों की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि अन्य किसी भी देश में अर्थव्यवस्था का 20 फीसद लोगों को इस संबंध में जागरूक करने की आवश्यकता है। लघु और मध्यम उद्योगों में हो रही प्रगति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष के आकड़े स्पष्ट करते हैं कि सबसे ज्यादा रोजगार सृजित करने वाला लघु और मध्यम उद्योग प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
Published on:
24 Nov 2019 08:30 pm
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