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मई दिवसः बीस के फेर में फंसा चमड़ा मजदूर

दुनिया भर में 1 मई को खून पसीना बहाने वाले मजदूर की भलाई के लम्बे चौडे़ व्याख्यान होंगे लेकिन जब मजदूर दिवस पर आगरा के चमड़ा मजदूर की हकीकत जानी तो आंखें फटी की फटी रह गई ।

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Sudhanshu Trivedi

Apr 30, 2016

labour day

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आगरा.
दुनिया भर में 1 मई को खून पसीना बहाने वाले मजदूर की भलाई के लम्बे चौडे़ व्याख्यान होंगे लेकिन जब मजदूर दिवस पर आगरा के चमड़ा मजदूर की हकीकत जानी तो आंखें फटी की फटी रह गई । जी हां, आगरा में चमडे़ का काम करने वाले 240 प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाता है । बैंक अधिकतम 12.5 प्रतिशत सालाना की दर से लोन देता है लेकिन वहां तक चमड़ा मजदूर की पहुंच नहीं है और ऋण माफिया इसी का फायदा उठाता है । वे इन मजदूरों को आधी रात को भी रुपए देने के लिए तैयार रहते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें 100 रुपए पर 20 रुपए महीना का ब्याज चुकाना पड़ता है । गरीब के घर में बीमारी जैसे सौ बहाने होते हैं औैर इसलिए मजबूरी का मारा चमड़ा मजदूर इनके चुंगल में फंसा हुआ है ।


बाहर खडे़ रहते हैं ऋण माफिया


जूता व कहीं-कहीं चल रही चमड़ा फैकिट्रयों के बाहर सोमवार को ये ऋण माफिया गेट पर ही खडे़ मिलते हैं, ताकि यहीं से उनसे पैसा वसूल लिए जाए । इसके लिए ये ऋण माफिया दबंगई का भी सहारा लेते हैं । ऐसे में सोमवार को ही मजदूरी का पैसा इन साहूकारो को देने के बाद अगली मजदूरी से पहले वापस रुपया उद्यार लेना इनकी मजबूरी हो जाता है । वहीं यदि उत्तरप्रदेश लेबर डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर नजर डालें तो मजदूरों को ऋण, प्रशिक्षण की सैंकडा़ें योजनाएं चल रही हैं लेकिन चमड़ा मजदूरों के हालात बताते हैं कि ये योजनाएं कागजों में ही चल रही हैं ।


इसलिए मनाया जाता है मजदूर दिवस


अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस जिसको मई दिवस के नाम से जाना जाता है, इसकी शुरुआत 1886 में शिकागो में उस समय शुरू हुई थी, जब मजदूर मांग कर रहे थे कि काम की अवधि आठ घंटे हो और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी हो। इस हड़ताल के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और बाद में पुलिस फायरिंग में कुछ मजदूरों की मौत हो गई, साथ ही कुछ पुलिस अफसर भी मारे गए। इसके बाद 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में जब फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया कि इसको अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए, उसी वक्त से दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा।