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आगरा। कई तरह के बुखार इस समय फैल रहे हैं, इसी में से एक बुखार है रूमेटिक फीवर। रूमेटिक फीवर के बढ़ते मामलों की जानकारी देते हुए इंन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पीटल की पीडियाट्रिक कॉर्डियोलॉजी की सीनियर कंसलटैंट डॉ. मनीषा चक्रवर्ती ने इस बुखार के उपचार और रोकथाम के बारे में जानकारी दी।
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ये हैं इस बुखर के लक्षण
डॉ. मनीषा चक्रवर्ती ने बताया कि रूमेटिक फीवर स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से होता है। ये गले की खरास से संबंधित जटिलताओं में से एक है। यह हृदय, मस्तिष्क और त्वचा से प्रभावित करता है, जिसमें इनफ्लेमेशन या सूजन आ सकती है। यह बीमारी मुख्य रूप से महिलाओं, बच्चों और युवाओं को प्रभावित करती है और माना जाता है कि बच्चो में इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो ये घातक हो सकता है।
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इस बीमारी का उपचार है कम
डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि इसके बारे यह भी जाना जाता है कि यह रूमेटिक हार्ट डिजिज का कारण बनता है। यह एक क्रोनिक हार्ट कंडीशन है। यह ह्रदय को नुकसान पहुंचाता है और बच्चे के शरीर को और परेशान करता है। इसे बच्चा कमजोर हो जाता है। वैसे तो रूमेटिक फीवर और रूमेटिक हार्ट डिजीज का पता लगाने और उसके प्रबंध के प्रभावी तरीके हैं, पर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं अकसर लोगों की जरूरत के समय पहुंच योग्य नहीं रहती हैं। भारत में इस बीमारी का उपचार कम होता है। डॉ. चक्रवर्ती ने बताया कि दुख की बात ये है कि रूमेटिक फीवर के बुखार के लिए जिस एंटी बायोटिक की आवश्यकता होती है, वह पेनिसिलिन है, जो बहुत बुनियादी और आसानी से पहुंच योग्य है।
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Published on:
14 Feb 2018 05:17 pm
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