
S. N. Medical College Agra
आगरा। गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में आॅक्सीजन न मिलने से तीस बच्चों सहित करीब 50 लोगों की मौत के मामलेे ने पूरे प्रदेेश को झकझोर कर रख दिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकारी अस्पतालों का ये कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले आगरा के एस एन मेडिकल कॉलेज में भी आॅक्सीजन न मिलने के कारण कई मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद यहां के रवैये में कोई फर्क नहीं आया। हालांकि एक साथ इतनी तादाद में मौत की घटना एस एन अस्पताल में फिलहाल सामने नहीं आई है। लेकिन यदि इस हादसे से अब भी सबक नहीं लिया गया तो भविष्य में ये अस्पताल भी ऐसी ही किसी घटना का शिकार हो सकता है। जानें अस्पताल का हाल
लापरवाह है स्टाफ
यहां अक्सर रात के समय स्टाफ मरीजों पर ध्यान नहीं देते। कई बार सिलेंडर में आॅक्सीजन खत्म होने के बाद स्टाफ दूसरा सिलेंडर नहीं लाते बल्कि तीमारदारों को बोल देते हैं। अपने मरीज को बचाने के लिए तीमारदार खुद आॅक्सीजन का सिलेंडर ढोकर लाते हैं।
तीन साल में मौत के कई मामले
अस्पताल में तीन साल के अंदर आॅक्सीजन के कारण होने वाली मौतों के कई मामले सामने आ चुके हैं। तीन साल पहले बाल रोग विभाग में एक ही रात में चार बच्चों ने आॅक्सीजन न मिलने के कारण दम तोड़ दिया था। वहीं एक साल पहले बाल रोग विभाग में एक बच्चे की मौत आॅक्सीजन के अभाव में हुई थी। आठ महीने पहले कैंसर विभाग में एक व्यक्ति व पांच माह पहले इमरजेंसी में एक व्यक्ति की मौत आॅक्सीजन न मिलने के कारण हो गई थी।
डॉक्टरों पर हुआ था एक्शन
बाल रोग विभाग में चार बच्चों की एक साथ मौत के मामले में डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई थी। तत्कालीन डॉ. अजय अग्रवाल को प्राचार्य पद से हटा दिया गया था। तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर दयाल और तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. हिमांशु यादव को निलंबित किया गया था। हालांकि बाद में दोनों को बहाल कर दिया गया।
इसलिए होती हैं मौतें
दरअसल अस्पताल मेें खाली और भरे सिलेंडर साथ रखे जाते हैं। इन सिलेंडरों की वजन से पहचान नहीं की जा सकती क्योंकि आॅक्सीजन का कोई वजन न होने के कारण खाली और भरे सिलेंडर एक जैसे वजन वाले ही रहते हैं। जब स्टाफ तीमारदारों को सिलेंडर लेने के लिए भेजते हैं तो वे इसमें फर्क नहीं कर पाते और कई बार खाली सिलेंडर ले आते हैं। ऐसे में खाली सिलेंडर लगने से मरीज की जान पर बन आती है।
क्या कहते है चिकित्सा अधीक्षक
इस बारे में एस एन अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र चौधरी कहते हैं कि आॅक्सीजन सप्लाई को बेहतर करने के लिए लिक्विड आॅक्सीजन टैंक के जरिए सेंट्रल आॅक्सीजन सिस्टम दो विभागों में लगाया गया है। इमरजेंसी सहित अन्य विभागों में भी जल्द ही लगाया जाएगा। इसके अलावा स्टाफ को सख्त हिदायत दे दी गई है। यदि किसी तरह की शिकायत मिलती है तो फौरन कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
12 Aug 2017 01:17 pm
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