
शाहजहाँ की असल कब्र पर फातिहा पढ़ते कमेटी के लोग
अपनी मोहब्बत को यादगार बनाने के लिए ताजमहल जैसी बेमिसाल खूबसूरत इमारत को बुलंद करने वाले मुगल बादशाह का 368 वां उर्स ( जन्मोत्सव) शुक्रवार से मनाया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले उर्स के पहले दिन तहखाने को खोलकर शाहजहां और मुमताज की कब्र पर गुस्ल, फातिहा और फूलों की चादरपोशी की रस्म अदा की गई। इस दौरान अकीदतमंदों के लिए तीन दिन तक ताजमहल पर मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा।
सैकड़ों सालों से मनाया जाता है उर्स
ताजमहल को बनवाने के लिए शाहजहां द्वारा 20 हजार कारीगर लगाए गए थे। यह सभी कारीगर 20 साल तक यहीं रहकर ताजमहल को बनाते रहे। इतिहासकारों के अनुसार शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों को ताउम्र जीवन यापन करने के लिए काफी पैसे दिए थे। इतने वर्षों तक यहां रहने के बाद कारीगर यहीं बस गए थे। इसी कारण यहां बसई नाम की बस्ती आज भी मौजूद है।
नहीं काटे थे कारीगरों के हाथ
इतिहास में एक अफवाह है की शाहजहां ने ताजमहल बनाने वालों के हाथ काट दिए थे पर ऐसा नहीं है।इतिहासकार अफसर आलम की किताब ताजमहल या ममीमहल के अनुसार ताजमहल बनाने के समय शाहजहां के खजाने में बहुत पैसा था और उसने कारीगरों को पैसे देकर उनसे ताउम्र कोई काम न करने का वायदा लिया था।
शाहजहां को पीर पैगंबर मानते हैं ताजगंज वासी
ताजमहल के आस पास के क्षेत्र में कारीगरों ने अपने मकान बना लिए थे। शाहजहां ने मकानों को इस तरह डिजाइन करवाया था की लोग घरों के बाहर अपनी दुकान खोलकर रोजी - रोटी का इंतजाम कर लें। स्थानीय लोग शहंशाह शाहजहां को सिर्फ राजा नहीं बल्कि पीढ़ियों से उनका परिवार पालने वाला पीर पैगंबर मानते हैं।
पहले लगता था मेला
बीते 368 सालों से शाहजहां के उर्स पर ताजमहल पर मेला लगाया जाता है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के नियमों के बाद यह मेला बहुत ही छोटे रूप में आ गया है। अब ताजमहल के रॉयल गेट पर शहनाई और मुख्य गुम्बद पर कव्वाली ही शेष बची है। हालांकि उर्स के समापन पर आज भी ताजगंज क्षेत्र में जगह - जगह लंगर का आयोजन होता है। अकीदतमंद ढोल नगाड़ों के साथ धार्मिक नारे लगाते हुए शाहजहां की कब्र पर चादरपोशी करते हैं।
शनिवार को होगी संगदल की रस्म
ताजमहल पर शाहजहां के उर्स के दूसरे दिन असल कब्रों पर संगदल की रस्म अदा की जायेगी। दोपहर दो बजे कमेटी और विभागीय अधिकारी तहखाने को खोलकर असली कब्रों पर चंदन का लेप लगाएंगे और अगरबत्ती जलाकर खुशबू की जायेगी। इसके बाद फूलों की विशेष चादर चढ़ाई जाएगी और मिलाद वी कव्वाली का आयोजन किया जाएगा।
रविवार को चढ़ाई जाएगी सद्भावना की सतरंगी चादर
खुद्दाम ए रोजा ताजमहल उर्स कमेटी के अध्यक्ष ता ने बताया की शाहजहां के उर्स के तीसरे दिन 1480 मीटर लंबी सतरंगी चादर पेश की जायेगी। स्थानीय लोगों द्वारा मिलकर सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम की मिसाल पेश करते हुए यह चादर पिछले 60 वर्षों से पहले से चढ़ाई जा रही है।
Published on:
17 Feb 2023 05:42 pm
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