
Sharad Purnima , Sharad Purnima 2017, Sharad Purnima Kab Hai, Sharad Purnima Kyo Manaya Jata Hai
आगरा। यूं तो प्रत्येक पूर्णिमा पर चांद गोल नजर आता है लेकिन, शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) की चांद की बात पूरे वर्ष भर में पड़ने वाली सभी पूर्णिमाओं से अलग है। वैदिक हिन्दू शास्त्रों में कहा जाता है कि इस दिन चांद की किरणें धरती पर अमृतवर्षा करती हैं। वैदिक हिन्दू शास्त्रों में इसे कोजागरी और रास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन चांद अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। शास्त्रों में यही मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में चांद से अमृतवर्षा होती है। भविष्यवक्ता और वैदिक सूत्रम के चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम का कहना है कि शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा इसलिए भी कहते हैं क्योंकि इसी दिन श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ बृज क्षेत्र में महारास की शुरूआत की थी। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा (Kojagri Purnima) भी कहते हैं। इस पूर्णिमा पर कुछ रस्में की जाएं तो रुठी हुई किस्मत भी बदल जाती है। इसका कारण है कि इस दिन स्वयं मां लक्ष्मी वरदान देने के लिए भ्रमण करती हैं।
शरद पूर्णिमा की कुछ और महत्वपूर्ण रस्म
1- भगवान को खीर चढ़ाना
2- पूर्णिमा की चांद को खुली आंखों से नहीं देखना। खौलते दूध से भरे बर्तन में चांद देखते हैं
3- चन्द्रमा की रोशनी में सूई में धागा डालना
4- खीर, पोहा, मिठाई रात भर चांद के नीचे रखना
5- शरद पूर्णिमा का चांद बदलते मौसम अर्थात मानसून के अंत का भी प्रतीक है
6- इस दिन चांद धरती के सबसे निकट होता है इसलिए शरीर और मन दोनों को शीतलता प्रदान करता है। इसका चिकित्सकीय महत्व भी है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा है
7- प्रत्येक प्रांत में शरद पूर्णिमा का कुछ न कुछ महत्व अवश्य है। विभिन्न स्थानों पर अलग अलग भगवान को पूजा जाता है। लेकिन, अधिकतर स्थानों में किसी न किसी रूप में लक्ष्मी की पूजा अवश्य होती है।
शरद पूर्णिमा का पर्व मनाने की विधि
1. इस दिन प्रात: काल स्नान करके आराध्य देव को सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करके आह्वान, आसान, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करना चाहिए।
2. रात्रि के समय गौदुग्ध (गाय के दूध) से बनी खीर में घी और चीनी मिलाकर अर्द्धरात्रि के समय भगवान को अर्पण (भोग लगाना) करना चाहिए।
3. पूर्ण चंद्रमा के आकाश के मध्य स्थित होने पर उनका पूजन करें और खीर का नैवेद्य अर्पण करके, रात को खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर दूसरे दिन उसका भोजन करें तथा सबको उसका प्रसाद दें।
ये है समय
शरद पूर्णिमा 23 अक्टूबर की रात्रि 10 बजकर 36 मिनट से आरम्भ होकर 24 अक्टूबर, दिन बुधवार को रात्रि 10 बजकर 14 मिनट तक है। वैदिक हिंदू पुराणों के अनुसार माना जाता है कि शरद पूर्णिंमा की रात को चांद पूरी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन चांदनी सबसे तेज प्रकाश वाली होती है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत गिरता है। ये किरणें सेहत के लिए काफी लाभदायक है।
मान्यता है कि टपकता है अमृत
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने शरद पूर्णिमा की विशेष खासियत के सन्दर्भ में बताते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा से जुड़ी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है। जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इस दिन लोग अपने घरों की छत में खीर बना कर रखते है। जिससे चांद की किरणें खीर पर पड़े जिससे वह अमृतमयी हो जाए। इसको खानें से न जाने कितने बड़ी-बड़ी बीमारियों से निजात मिल जाती है। कहीं-कहीं पर इस दिन सार्वजनिक रूप से खीर वितरित भी की जाती है।
मां लक्ष्मी की कृपा
पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि धर्म ग्रंथों के अनुसार माना जाता है कि sharad purnima के दिन श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रास लीला भी करते है। साथ ही माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात के समय भ्रमण में निकलती हैं, यह जानने के लिए कि कौन जाग रहा है और कौन सो रहा है। उसी के अनुसार मां लक्ष्मी उनके घर पर ठहरती है। इसीलिए इस दिन सभी लोग जागते है। जिससे कि मां की कृपा उन पर बरसे और उनके घर से कभी भी लक्ष्मी न जाएं। पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि अगर शरद पूर्णिमा को वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से देखा जाए तो माना जाता है कि इस दिन से मौसम में परिवर्तन होता है और शीत ऋतु की शुरूआत होती है। इस दिन खीर खानें को माना जाता है कि अब ठंड का मौसम आ गया है इसलिए गर्म पदार्थों का सेवन करना शुरु कर दें। ऐसा करने से हमें ऊर्जा मिलती है।
Updated on:
24 Oct 2018 12:47 pm
Published on:
24 Oct 2018 10:20 am
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