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भोलेनाथ की आराधना का प्रमुख पर्व है महाशिवरात्रि (Mahashivratri)। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र बताते हैं कि शिवपुराण के ईशान संहिता में कहा गया है कि शिवरात्रि के दिन महादेव करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले रूप में अवतरित हुए थे। इसी दिन उनका विवाह माता पार्वती से हुआ था। इसलिए ये दिन महादेव को अत्यंत प्रिय है। ज्योतिषाचार्य से जानिए महाशिवरात्रि व्रत का महत्व और पूजन विधि।
इसलिए करें शिवरात्रि का व्रत
मान्यता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और आत्मा की शुद्धि होती है। ये व्रत मनुष्य को नरक से मुक्ति दिलाने वाला है। यदि कुंवारी लड़कियां इस व्रत को रहें तो उन्हें योग्य वर प्राप्त होता है। सुहागिन स्त्रियां भी शिवरात्रि के दिन व्रत रखती हैं। ऐसा करने से उनके पति का जीवन और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा बना रहता है। वहीं पुरुषों को महाशिवरात्रि पर व्रत रखने से व्यवसाय में वृद्धि और नौकरी में तरक्की मिलती है।
शिवलिंग का जरूर करें पूजन
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पूजन जरूर करना चाहिए क्योंकि मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन जहां-जहां भी शिवलिंग स्थापित है, उस स्थान पर भगवान शिव का स्वयं आगमन होता है।
ऐसे करें पूजन
सुबह स्नान करके शिवलिंग के समक्ष व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें। पुष्प, बेलपत्र, धतूरा और बेर आदि चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर मंत्र का जाप करें। शिवस्तुति व शिवस्त्रोत का पाठ भी करना चाहिए। सुबह व शाम के समय महादेव की आरती करें। हो सके तो चारों पहर शिव जी का पूजन करें।
Updated on:
04 Mar 2019 01:18 pm
Published on:
04 Mar 2019 10:42 am
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