
ancient weapons
आगरा। आज आधुनिक हथियार हैं, लेकिन प्राचीन हथियारों की कुछ बात ही अलग थी। ये हथियार आपका देखने के लिए मिलेंगे गुरुद्वारा गुरु का ताल में। जहां हर वर्ष श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश उत्सव के अवसर पर निकलने वाले विशाल नगर कीर्तन में इन्हें देखने का अवसर मिलता है।
हर हथियार का अलग ही प्रयोग
मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया कि हर हथियार का युद्ध के दौरान अलग ही प्रयोग किया जाता था। सबसे अहम हथियार है गुर्ज। गुर्ज दो प्रकार का होता है, एक होता है गदा और दूसरा होता है फाड़ीदार। इसके एक प्रहार से प्रतिद्धंदी कितना भी ताकतवर क्यों न हो, धराशाही हो जाता है। इसके बाद कटार। कटार नजदीक से प्रहार करने के काम आती है। इसका प्रयोग प्राचीन काल में शेर के हमले के दौरान किया जाता था। लाटू का प्रयोग दुश्मनों के बीच घिरने पर किया जाता था, लाटू आपके आस पास किसी को भटकने भी नहीं देगा, ये आपके चारों ओर एक बड़ा सुरक्षा घेरा बना देता है।
होता है अभ्यास
मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया संत सिपाही रणजीत अखाड़ा द्वारा सिख मार्शल आर्ट का अभ्यास किया जाता है। छठवें गुरु श्री हरगोविंद साहिब व दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह द्वारा प्रयुक्त व प्रचारित पुरातन अस्त्रों शास्त्रों का प्रदर्शन करना सिखाया। इनमें ढाल से विरोधी के प्रहार को बचाना, पट्टा, कंडयाला, सैफ, जमदाड, तलवार, किर्च, खंडा, कुल्हाडी, कटार, भाला, लाठी व चक्कर को कैसे युद्ध कला में प्रयोग किया जाता है, इसका अभ्यास कराया।
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Published on:
13 Dec 2017 04:50 pm
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