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मोटे-पतले-गंजे- स्मार्ट होने के कंपलीमेंट्स 25 साल बाद फिर मिले पुराने यार

-स्कूल के साथियों से मिलने के लिए यूएसए, दुबई, हांगकांग, बैंकॉक, सिंगापुर से आए तो लौट आया बचपन -सेंट पीटर्स कॉलेज, आगरा के कैम्पस में हँसी, ठहाके, ठिठोली, जीभर के गले मिले -अब यादों को हवा दे दो, आज पुराने यार साथ हैं, बचपन दोबारा जी लेने दो आज पुराने यार साथ हैं

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Old students

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आगरा। अब यादों को हवा दे दो, आज पुराने यार साथ हैं, बचपन दोबारा जी लेने दो आज पुराने यार साथ हैं। 25 साल के बाद जब बचपन स्कूल लौटा तो कुछ ऐसे ही जज्बात थे 40-45 साल के लड़कों के दिल में। यारों का गले मिलना, मोटे-पतले-गंजे- स्मार्ट होने के कंपलीमेंट्स... स्कूल के दिए निकनेम की आवाजें...दो-चार प्यार भरी गाली बकना...हंसी के गूंजते ठहाके...बस यही सब था सेंट पीटर्स कॉलेज, आगरा के कैम्पस में । 30 नवंबर 2019 को बैच 1994 के साथ पढ़े साथी आज 25 साल बाद दोबारा वहीं इकट्ठा हुए 'सिल्वर जुबली रीयूनियन' करने। पिच्चासी लड़कों को पिछले दो महीनों के अथक प्रयास के बाद आज यहां एक साथ लाया गया। 6 लोग यूएसए से, दो दुबई से, एक हांगकांग से, एक बैंकॉक से, दो सिंगापुर से...केवल पुराने साथियों से मिलने के लिए आज यहां आए थे। आगरा के बाहर से आने वालों की गिनती भी 30 से ज्यादा है।

रिटायर टीचर्स खोजे गए

अरे उधर तो देखिए- स्कूल में जिनकी छड़ी से भागे-फिरते थे वे रिटायर्ड टीचर्स भी आंखों में खुशी लिए आज के इस आयोजन में हिस्सा लेने आ पहुंचे थे । 25 से भी ज्यादा रिटायर्ड टीचर्स को उनके घर जाकर इनविटेशन दिया गया था। उनके आशीर्वाद वचनों का वीडियो बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया और उनका प्रत्यक्ष आशीर्वाद सालों बाद आज सब ले रहे थे। 1994 में प्रिंसिपल रहे फादर जॉर्ज पॉल इस आयोजन के मुख्य अतिथि थे। आज के आयोजन में शामिल होने के लिए नैनीताल में एक जरूरी मीटिंग को उन्होंने पोस्टपोन किया था। कॉलेज के प्रिंसिपल फादर कोरिया, वीपी फादर, एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े लोग और कुछ टीचर्स जो अभी स्कूल में ही पढ़ाते हैं, सबके सहयोग से यह आयोजन बहुत ही विशाल बन गया था।

गुरुजनों का सम्मान

दीप प्रज्ज्वलन कर सभी टीचर्स और अतिथियों का स्वागत किया गया। उनके स्वागत में मोहित महाजन और प्रशांत शर्मा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। फादर कोरिया को सर्वप्रथम धन्यवाद देते हुए मंच पर आशीर्वचन देने के लिए आमंत्रित किया गया । उन्होंने आयोजन की सराहना की और स्कूल से जुड़े रहने की तथा टीचर्स को सम्मान देने की भी सराहना की। उनका सरप्राइज़ बर्थडे केक भी काटा गया और उनका सत्कार किया गया इसके बाद सारे नए-पुराने गुरुजनों का स्वागत कर सम्मानित किया गया, जिसमें वाई.एस.वशिष्ठ , डॉ. अजय बाबू, डॉ. नीलम मेहरोत्रा, डॉ. वीरेंद्र सिंह, श्रीमती एम. खंडेलवाल, श्रीमती भाटिया, श्रीमती टंडन, श्रीमती डेडोना, हैरी क्लेरेंस, श्रीमती आशा शर्मा, सुश्री पेंसी थॉमस, श्रीमती सुप्रीति कौर, ए.पी.एंटोनी, पीटर एंथोनी मुख्य रूप से उपस्थित थे। 10 ऐसे टीचर्स को भी दिल भर के याद किया गया जो दुनिया से विदा ले चुके हैं। आलोक, प्रवीण एवं कृष्णा ने सभी के बारे में अपने विचार रखे। वीडियोज़ के माध्यम से उन टीचर्स के आशीर्वचन भी मिले जो स्वास्थ्य खराब होने की वजह से आयोजन में आ नहीं सके। विंग कमांडर राजी नैयर और कैप्टन (डॉ.) विशाल श्रीवास्तव-दो ऐसे साथियों को भी याद किया गया जो बहुत कम उम्र में देश-सेवा करते हुए दुनिया से विदा हो गए। 1994 में नॉन टीचिंग स्टाफ के रूप में काम करने वाले 6 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का भी सम्मान किया गया ।

डायरेक्ट्री का विमोचन

आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा 136 साथियों की विस्तृत जानकारी देती एक अभिनव डायरेक्ट्री, जिसका अनावरण फ़ादर जॉर्ज पॉल व सभी टीचर्स के कर-कमलों द्वारा हुआ। यह अनूठी डायरेक्ट्री सभी के अथक प्रयासों से बन पाई । इसमें प्रिंसिपल एवं सभी टीचर्स की शुभकामनाओं को जगह दी गई। सभी साथियों के नाम, फोटो, जन्मतिथि, उनके काम, उनके परिवार की विस्तृत जानकारी और एक उनके पारिवारिक फोटो को भी शामिल किया गया। जाहिर है इतना डेटा एकत्रित करने के लिए कितने अभूतपूर्व प्रयास किये गये होंगे। इसमें हर साथी का एक QR code बनाया गया है जिससे भविष्य में उस कोड को स्कैन करने से उस साथी की जानकारी मिलती रहे। साथ ही कार्य-क्षेत्र, शहर, बर्थ-डे, एनिवर्सरी-डेट आदि के नाम पर इंडेक्सिंग भी की गई है। हर साथी के बारे में दूसरे साथियों की राय को भी डायरेक्ट्री में शामिल किया गया है। सभी ने इसके बारे में विस्तार से जाना।

कैंटीन में मिलने वाला वन-समोसा

आयोजन को खुशनुमा करता करता हुआ मधुर गीत डॉ.अमित सक्सेना ने सभी को सुनाया। इसके बाद हांगकांग से आए प्रवीण अग्रवाल ने भी स्वर छेड़े और मस्ती बढ़ते हुए ग्रुप-डांस पर पहुंची जिसमें दीपक , नवीन , प्रवीण और गौरव ने भाग लिया । शिक्षकों ने अपने बच्चों के साथ गाने गाए , नृत्य किया और सालों पुराने रिश्तों को यादों की एक नई डोर से बांधा। कार्यक्रम के अंत में सभी गुरुजनों को सम्मानपूर्वक भोजन करवाया गया और सभी मित्रों ने पुराने दिनों में स्कूल कैंटीन में मिलने वाला वन-समोसा और आइसक्रीम ब्रेड खाकर एक बार फिर स्कूल के जीवन को बाहों में भरने का प्रयास किया ।

दो महीने लगे

व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से 140 से भी अधिक साथियों को 2 महीने में एक साथ जोड़ा गया और सबको एक-दूसरे के बारे में बताया गया। इनमें से जो किसी कारण से आ नहीं सके उनको मलाल था कि उन्होंने यह खूबसूरत मौका खो दिया । आयोजन को सफल बनाने में डॉक्टर अमित सक्सेना, आशीष साराभाई, नरेंद्र रमानी, अनुरंजन सिंघल, भुवनेश्वर अग्रवाल, प्रशांत शर्मा, गौरव अग्रवाल, संजय अग्रवाल, आलोक भास्कर और नवीन अग्रवाल की मुख्य भूमिका रही। स्कूल में हुआ यह आयोजन रीयूनियन कार्यक्रम का पहला चरण था ।