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Whatsapp Group में मोदी को लेकर रार, ‘सत्ता का इतना घमंड है तो दीवानी आ जाओ, शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं रहेगा’

-वरिष्ठ अधिवक्ता को चैम्बर में आकर देख लेने की धमकी और गाली के बाद शुरू हुआ विवाद -एडमिन ने कहा- दोपहर 12 बजे तक माफी न मांगी तो ग्रुप से निकाल दूंगा

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Narendra modi

आगरा। सोशल मीडिया का सबसे मजबूत फ्लटफार्म है Whatsapp। इसी वॉट्सऐप पर हजारों ग्रुप बने हुए हैं। इन्हीं से एक ग्रुप है नेशन फर्स्ट। इस समूह को इसलिए बनाया गया था कि देश के बारे में चिन्तन होगा। शुरू में तो सब ठीकठाक चला। फिर दो पक्ष हो गए। एक भारतीय जनता पार्टी समर्थक तो दूसरा विरोधी। बहसबाजी होती रहती है। कई प्रतिभागी रूठ गए। उन्हें मनाया गया। यहां तक कि ग्रुप एडमिन भी लेफ्ट हो गए। ठाकुर पवन सिंह के निवास पर कई बार बैठकें हुईं। सब ठीक हो गया। दो दिन से समूह में फिर से रार फैली हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता को दीवानी परिसर में आकर उनके चैम्बर में देख लेने की धमकी दी गई है। गाली भी लिखी गई है। अब अधिवक्ता अमीर अहमद ने चुनौती दी गई है कि आकर देख लो, शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं बचेगा।

भाजपा का विरोध और समर्थन

नेशन फर्स्ट ग्रुप का निर्माण मानवेन्द्र मल्होत्रा ने किया है। इसमें समाज के अधिकांश बुद्धिजावी और प्रतिष्ठित व्य़क्ति जुड़े हुए हैं। भाजपा के विरोध का झंडा ठाकुर पवन सिंह और रवीन्द्र पाल सिंह टिम्मा उठाया करते थे। डॉ. रजनीश त्यागी ने शानदार तरीके से उनका माइंड वॉश किया और भाजपा में शामिल करा लिया। अब दोनों के मुंह पर ताला सा लग गया है। खैर, उनका स्थान हास्यकवि पवन आगरी ने ले रखा है।

गुस्से में अमीर अहमद

तीन नवम्बर, 2019 को डॉ.रजनीश त्यागी, शुभम सोनी और वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द शर्मा के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री को लेकर बहस हो गई। अधिवक्ता के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया गया। उन्हें गाली तक दे दी गई। अब इसे लेकर ग्रुप में रार फैल गई है। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अमीर अहमद की ये पोस्ट पढ़िए और मामले की गंभीरता को समझिए- मैंने अभी अभी आज की शर्मनाक पोस्टिंग्स देखी है। त्यागी जी व शुभम, ये आगरा के सीनियर एडवोकेट श्री अविनाश शर्मा हैं, जो आगरा बार एसोसियेशन के अध्यक्ष सचिव रहे हैं, उनके लिये आप लोगों ने जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है वह अत्यंत निंदनीय है। आप दोनों ही सबके साथ इस तरह का व्यवहार कर चुके हैं। अब आपकी इतनी हिम्मत हो गई कि आप वक़ील को उसके चैम्बर में आकर देखने की धमकी दे रहे हैं। सत्ता का अगर इतना ही घमंड है तो कल सुबह (यानी आज) दीवानी उनके चैम्बर पर आ जाओ और उन्हें देख लो फिर अपनी हालत देखना, शरीर पर एक भी कपड़ा बाकी नहीं रहेगा। शर्म आनी चाहिये आप लोगों को आप उनके लिये ... शब्द का प्रयोग कर रहे हैं । सुबह दीवानी आ जाओ तो पता चल जायेगा कौन ... है और कौन हलाली।

पवन सिंह ने माफी मांगी

ठाकुर पवन सिंह ने लिखा है- मैंने अभी सारी पोस्ट पढ़ी हैं। मुझे बहुत ही वेदना और दुख है। इतने शांत और ज्ञानी लोग आज धैर्य खोते नजर आ रहे हैं। पहले किसी ने धैर्य खोया बाद में किसी ने। हिंसा या हिंसक शब्दों का पढ़े लिखे समाज में कोई भी स्थान नहीं होता है। हां, विचार हमेशा स्वागत होते हैं। एक बात जरुर कहना चाहूंगा कि पिछले कुछ समय से मुझे ऐसा लग रहा है कि कुछ लोग इस ग्रुप को बदनाम और खराब करना चाह रहे हैं। मैं उनका नाम भी यहां लिख सकता हूं, लेकिन उनको एक मौका और देना चाहता हूं। शायद वह अपनी हरकतों से बाज आ जाएं। क्रोध थोड़ी देर का होता है। आवेश समाप्त होते ही सब भाई बन जाते हैं। अपने शब्दों पर सबको ज्ञान होता है कि उन्होंने क्या कहा है क्या नहीं कहा है। मैं दोनों पक्षों से, दोनों पक्षों की तरफ से माफी मांगता हूं। मेरे ऐसे अभिनव प्रयोग जिसमें शहर के चुनिंदा लोगों को रखा गया था, आज कुछ शरारती लोग अपने मंसूबे में कामयाब होते नजर आ रहे हैं। यहां हम किसी पक्ष के लिए नहीं बढ़ेंगे। हम सब एक परिवार और वैचारिक जुगाली करने वाले लोग हैं। कितना जरूरी दाहिना हाथ है, शायद उससे बड़ा जरूरी बांया हाथ भी है। सभी से मेरी हाथ जोड़कर पुन प्रार्थना है कि अपना संयम ना खोएं। यह प्रकरण यहीं समाप्त है।

संदीप अरोरा का शब्द नृत्य

संदीप अरोरा की पोस्ट भी पढ़ने लायक है- रात की पूरी चर्चा अब पढ़ी, त्यागी जी का भाषा से संयम खोना.. मुझे लगता है त्यागी जी वकील साहब को ब्लफ (जैसा अतुल भाई बार बार लिखते रहे कि डमी सिम बोल रही है) समझ कर बड़ी चालें चल गए। शुभम भैया, आपकी उम्र के अनुसार व्यवहार करेंगे तो लंबा व सम्मानित सामाजिक जीवन जीयेंगे अन्यथा यहां हर सेर को सवा सेर उपलब्ध है। याद रखियेगा की सत्ता का भी चरित्र होता है, फिर चाहे वो किसी पार्टी की क्यों न हो, इसलिए किसी के सम्मान से खिलवाड़ भारी पड़ सकता है। इस पूरे प्रकरण में अभी तक एडमिन सोनू की भूमिका तटस्थ व शानदार दिख रही है। एक निकम्मे एडमिन को भी लाइन हाजिर करना बढ़िया कदम है। इससे बाकी के एडमिन साहेबान को सबक लेना चाहिए। वैसे शर्मिंदा भी हूँ कि रात को जिस मैदान में इतना भीषण युद्ध हुआ हो, शब्द मुंड बिखरे हों उसी रण क्षेत्र में युद्ध के ठीक बाद के सन्नाटे में अनजाने में मेरा शब्द नृत्य...।

मेरा विचार न देखकर मेरी पार्टी देखी जा रही है

पवन सिंह का एक पोस्ट में दर्द कुछ इस तरह सामने आया- अविनाश शर्मा जी एक नामी वकील और बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। उनका काफी नाम मैंने सुना है। ग्रुप का सीनियर मेम्बर होने के नाते और जब उनको अपशब्द कहा गया। इसलिए मेरी अंतिम पोस्ट है, क्योंकि अब मेरा विचार न देखकर मेरी पार्टी देखी जा रही है। जो लोग मुझे त्यागी जी के पक्ष का मानकर पोस्ट पढ़ रहे हैं या मुझे बीजेपी का मानकर मेरी पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि वह सही नहीं है, क्योंकि मैंने अपशब्द कहने वालों को एक बार भी सही नहीं कहा है। बस मैं यह कह रहा हूं कि बैठ कर बात होनी चाहिए। ग्रुप में चील कव्वे उड़ाने से कुछ नहीं होगा।

वकीलों की ग़ैरत को ललकारा जा रहा

इसका जवाब अमीर अहमद एडवोकेट ने दिया है- आपमें किसी को बीजेपी नज़र नहीं आ रही, दरअसल आप ख़ुद अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ को दबा रहे हैं। मेहताब खान एडवोकेट ने लिखा है-... कहा जा रहा है। बाप तक पहुंचा जा रहा है। चैम्बर में पहुंचने का ग्रुप ऐलान और आह्वान किया जा रहा। घर-चैम्बर को धुंआ कर देने का ऐलान किया जा रहा। वकीलों की ग़ैरत को ललकारा जा रहा है। आप कप्तान आज आत्मा से राजनीति की बात कर रहे हो।

एक और पोस्ट देखिए

क़ातिल और मकतूल को एक ही पलड़े में नहीं रखा जा सकता। आपको ये तो निर्णय लेना ही होगा कि आज दोष किसका है। वकीलों के चैम्बर में आकर या आपके घर पर आकर आपको देखने की धमकी देना क्या नज़रअंदाज़ करने योग्य है?

दो लोगों को 12 बजे तक का अल्टीमेटम

ग्रुप एडमिन मानवेन्द्र मल्होत्रा ने कई बार ये सूचना डाली है- त्यागी जी और शुभम, या तो अविनाश जी से खेद प्रकट करें नहीं तो 12 बजे दिन में मैं दोनों को रिमूव कर दूंगा। बद्तमीजी और अभद्रता किसी की बर्दाश्त नहीं होगी। मेरे व्यक्तिगत संबंध चाहे कुछ भी हों, जब बात ग्रुप के एडमिन बतौर आएगी तो जो गलत होगा, वो बाहर होगा। कल व्यस्तता के कारण ग्रुप की चैट नहीं पढ़ पाया था। अभी सुबह सब पढ़ा। दीपक सरीन जी को जहां माहौल शांत करने का काम करना था, वो लगातार आग में घी डालने का काम करते रहे। ग्रुप ने मेरा विवाद भी देखा और टिम्मा जी और त्यागी जी का भी, सबने बैठकर सॉल्व करवाया। लेकिन इस बार सीमाएं लांघी गयी है। इसके लिए कार्यवाही जरूरी है। ग्रुप एडमिन।