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ऐतिहासिक इमारतों के शहर में अनूठा प्राकृतिक स्थल, कीठम

मुगलकालीन इमारतें, किला और बाग़ बगीचे के अलावा  ताजनगरी आगरा में एक अनूठा प्राकृतिक स्थल भी है।

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Bhanu Pratap Singh

Apr 28, 2016

Soor Sarovar Agra

Soor Sarovar Agra

आगरा।
मुगलकालीन इमारतें, किला और बाग़ बगीचे के अलावा ताजनगरी आगरा में एक अनूठा प्राकृतिक स्थल भी है। इस स्थल को कीठम झील के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही ये झील क्षेत्र एक पक्षी विहार भी है जिसे सूर सरोवर पक्षी विहार के नाम से भी जानते हैं।


कहां है स्थित

कीठम आगरा से करीब 22 किलोमीटर दूर एक रुनकता नाम के गांव में पड़ता है। रुनकता आगरा जिले का एक छोटा कस्बा है और यहां रुनकता नाम से रेलवे स्टेशन भी है। NH2 पर आगरा से दिल्ली जाते समय सिकन्दरा से आगे रुनकता नाम की जगह आती है, उससे कुछ किलोमीटर आगे दाईं तरफ झील की तरफ जाने वाला प्रवेश द्वार आता है।


सरकार ने किया राष्ट्रीय पक्षी अभ्यारण्य घोषित

कीठम झील के पास बना सुरम्य सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य में स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की 100 से ज्यादा प्रजातियां हैं। साथ ही 12 प्रजाति के स्तनपायी और 18 प्रजाति के सरीसृप का भी यह ठिकाना है। स्पूनबिल, साइबेरियन सारस, सरने सारस, ब्राहमनी बत्तख, बार-हेडेड गीसे और गडवॉल्स व शोवेलर्स यहां पाई जानी वाली पक्षियों की कुछ प्रमुख प्रजातियां है। इस अभ्यारण्य तक कीठम रेलवे स्टेशन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। उत्तर प्रदेश वन विभाग ने 27 मार्च 1991 को इस पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय पक्षी अभ्यारण्य का नाम दिया।


हाईवे से एक किलो मीटर अंदर है झील

हाईवे से करीब 1.20 किमी चलने के बाद प्रथम बार सड़क के दाहिने तरफ पानी से परिपूर्ण कीठम झील दिखती है। यहां से झील का स्वरूप बड़ा ही मनोरम दिखाई देता है, कुछ अंजान और विदेशी प्रवासी पक्षी भी नजर अक्सर नजर आते हैं।


सूर कुटी आश्रम भी है यहां मौजूद

झील के इसी किनारे-किनारे करीब आधा किलोमीटर अंदर की तरफ चलने पर एक रास्ता दाहिने तरफ जाता दिखाई देता है। यहीं पर यमुना नदी के किनारे एक आश्रम है। इस जगह का नाम सूर कुटी है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से करीब ढ़ाई किलीमीटर दूर है। यहां पर कवि सूरदास जी की याद में समर्पित एक अंधे बच्चों का विद्यालय है, उनके रहने की व्यवस्था कक्ष, एक सूर श्याम मन्दिर, महाकवि सूरदास स्मारक और एक आश्रम है। यहां पर यमुना किनारे घूमने का भी अपना अलग आनन्द है। यहां पर भी देशी विदेशी प्रवासी पक्षियों का दर्शन हो जाते हैं।


भालू सरंक्षण केंद्र आकर्षण का केंद्र है

झील के किनारे-किनारे कुछ दूर चलने के बाद भालू सरंक्षण गृह है। यहां पर काले भालुओं को एक बड़े से खुले वातावरण में एक बड़े से बाड़े में रखा गया है। बाड़े के चारो तरफ एक ऊंची दीवार और उसके ऊपर कंटीली विद्युत प्रवाह करती लोहे की तार लगी हुई है। यहां पर आने वाले पर्यटकों को वॉच टावर से इस केंद्र में रहने वाले भालुयों को दिखाया जाता है।


बोटिंग का लेते हैं पर्यटक आनंद

यहां पर भालू के बाड़े से कुछ कदम चलने के बाद बोटिंग आता है, जहां से झील में बोटिंग करने के लिए पेडल बोट उपलब्ध हो जाती है। यहां पर बोटिंग के लिए भी टिकिट बाहर के टिकिट घर से लानी पड़ती है। यहां से थोड़ा और आगे चलने पर दाहिने तरफ एक छोटा पार्क और उसी पार्क में एक केंटीन भी है। पिकनिक मनाने वाले लोग इस पार्क में खा पीकर आराम करते हैं और कुछ अपनों के साथ खेल कूद कर अपनी पिकनिक के आनन्द की अनुभूति करते हैं।


क्या है शुल्क
प्रवेश द्वार पर एक टिकिट काउंटर भी है, जहां से झील क्षेत्र में प्रवेश शुल्क प्रतिव्यक्ति रु 20/- अदा करके ही इस परिसर में प्रवेश किया जा सकता है। उसके आलावा कार और बाइक अंदर ले जाने शुल्क अलग से देना होता है। यदि झील में बोटिंग करनी है या भालू सरंक्षण गृह देखना है तो उनका टिकिट अलग से से इसी काउंटर लेनी होती है । ध्यान रहे कि ये जगह कुछ किलोमीटर अंदर है, सो टिकिट लेकर ही अंदर जाएं क्योंकि अंदर किसी भी प्रकार की टिकिट नहीं मिलती है।

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