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National Handwriting Day: सोशल मीडिया के युग में खत्म सा है हाथ से लिखने का रिवाज, नहीं रहे Handwriting के मायने!

  National Handwriting Day पर पढ़िए लिखने की आदत खत्म होने से कैसे कमजोर हो गई रिश्तों की डोर और क्या क्या हुए नुकसान।

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आगरा

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suchita mishra

Jan 23, 2020

National Handwriting Day

National Handwriting Day

एक समय था जब लोग हाथों से कागज पर लिखकर अपने जज्बात उतारा करते थे। ये जज्बात कभी डायरी में उतरकर बोझिल मन को हल्का करने का काम करते थे, तो कभी चिट्ठियों के माध्यम से करीबी लोगों तक पहुंचते थे। ऐसे में पढ़ने वाले को भी लिखने वाले के हर शब्द में उसके प्यार और भावनाओं का अहसास होता था। लोगों का दायरा बेशक सीमित था, लेकिन दूर रहकर भी दिल मिले रहते थे। लिखते समय लोग Handwriting के प्रति बेहद गंभीर होते थे क्योंकि पढ़ने वाले भी अक्सर इस पर गौर किया करते थे। लेकिन आज सोशल मीडिया के युग में हाथों से लिखने का चलन बिल्कुल समाप्त सा हो गया है। ऐसे में Handwriting की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जाता। आज 23 जनवरी को National Handwriting Day के मौके पर जानते हैं क्या कहना है इस पर आम लोगों का।

सोशल मीडिया ने जमाने को बना दिया प्रैक्टिकल
सीमा गर्ग कहती हैं कि मुझे याद है कि जब मैंने पहली बार लिखना सीखा था तो मेरी मां कहा करती थी कि बेटा इतना सुंदर लिखने का अभ्यास करो कि Handwriting मोती सी नजर आए। परीक्षाओं में Handwriting के भी नंबर हुआ करते थे। राइटिंग को सुंदर बनाने के लिए लोग घंटों पेज पर लिखकर अभ्यास किया करते थे। लेकिन अब इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। सोशल मीडिया के दौर को प्रैक्टिकल जमाना माना जाता है। आजकल लोग Handwriting या लेखन आदि की बातों को दकियानूसी बताकर दरकिनार कर देते हैं। परीक्षाएं भी आनलाइन होने लगी हैं। लिखने से ज्यादा लोग मोबाइल में टाइप करने में आसानी महसूस करते हैं। ऐसे में Handwriting को लेकर बात करना भी लोगों को रास नहीं आता।

स्कूल के बच्चों पर नकारात्मक असर
देविका सक्सेना पेशे से अध्यापिका हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया ने लोगों की लिखने की आदत को बिल्कुल खत्म सा कर दिया है। अब लिखने के लिए पेन उठाओ, तो ज्यादा देर कुछ लिखा नहीं जाता। ऐसे में Handwriting की तो बात ही करना ही जैसे बेइमानी है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आजकल के बच्चों पर पड़ रहा है। सोशल मीडिया ने बच्चों की भाषा पर पकड़ को कमजोर कर दिया है। हिंदी लिखना तो बच्चे जैसे पसंद ही नहीं करते। अंग्रेजी लिखते भी हैं तो गलत लिखते हैं। वहीं आजकल तमाम शब्दों के शॉर्टकट्स चलन में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर चैटिंग की आदत ने बच्चों को इन शॉर्टकट्स का आदी बना दिया है। लिहाजा नोटबुक पर लिखते समय या परीक्षा के दौरान अक्सर वे सही शब्द की जगह शॉर्टकट शब्द जैसे Please को Pls, Because को Bcoz, You को u लिखते हैं। जिनका जिक्र अंग्रेजी के शब्दकोश में है ही नहीं।

लिखने का चलन कम होने से रिश्तों की डोर कमजोर हुई
पंकज दुबे का कहना है कि सोशल मीडिया जब आया था तो लगा था कि लोगों से सम्पर्क का दायरा बढ़ेगा और रिश्ते मजबूत होंगे। लेकिन इसने तो रिश्तों के मायने ही बदल दिए। सोशल मीडिया के अतिशीघ्र रिस्पॉन्स ने लोगों की लिखने की आदत को प्रभावित किया। इसके कारण लोगों ने पत्राचार के जरिए हाल चाल लेना बंद कर दिया। संपर्क का दायरा इतना बढ़ा दिया कि अब उनसे निभा पाना ही मुश्किल हो गया है। विभिन्न अवसरों पर विश करना भी मात्र एक औपचारिकता रह गई है। आमने सामने रहकर कोई किसी से बात नहीं करना चाहता। जबकि पहले जब लोग लिखा करते थे, तो फुर्सत निकाल कर एक एक शब्द को कीमती मानकर अपनी भावनाएं लिखते थे। लिखते समय Handwriting का विशेष खयाल रखा जाता था। पढ़ने वाले भी न सिर्फ इस पर गौर करते थे, बल्कि खुलकर प्रशंसा भी किया करते थे। पत्र का लोग बेसब्री से इंतजार करते थे और पढ़ते समय मानो लगता था, कि एक एक शब्द जीवंत हो गया है। पहले दायरा सीमित था, लेकिन रिश्तों की डोर बहुत मजबूत थी। लेकिन जैसे जैसे लिखने की आदत खत्म होने लगी, Handwriting पर बात होना भी बंद हो गया। आज चैटिंग के युग में कॉपी पेस्ट का जमाना है। इस कारण रिश्तों की डोर बहुत कमजोर हो गई है।