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स्प्रिचुअलिटी निखार रही आगरा के यूथ की पर्सनेलिटी

युवा भी स्प्रिचुअलटी के जरिए जीने का तरीका सीख रहे हैं। मैनेजमेंट गुरु भी मानते हैं कि आध्यात्म के बिना जीवन का मंत्र नहीं सीखा जा सकता।

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Bhanu Pratap Singh

Apr 01, 2016

Spirituality

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आगरा।
स्प्रिचुअलिटी के मायने आगरा युवाओं के लिए बदल गए हैं। वे अब स्प्रिचुअलिटी के माध्यम से न केवल मैनेजमेंट के गुर सीखते हैं बल्कि पर्सनेलिटी में निखार भी ला रहे हैं। स्प्रिचुअल बुक्स महाभारत, भगवतगीता जैसी पुस्तकों के जरिये मैनेजमेंट का ज्ञान बांटा जा रहा है। मैनेजमेंट गुरू इन बुक्स के जरिये मैनेजमेंट के फण्डे सीखने को प्रेरित कर रहे हैं। वहीं इसके माध्यम से अब पर्सनेलिटी डवपलमेंट भी किया जा रहा है।


इंटरनल डवलपमेंट जरूरी

मैनेजमेंट के प्रोफेसर प्रो. करूणेश सक्सेना बताते हैं कि युवाओं के लिए पर्सनेलिटी डवलपमेंट का मतलब अब सिर्फ कम्युनिकेशन स्किल, बॉडी लैंग्वेज, एटिकेट्स जैसे सॉफ्ट स्किल्स नहीं, बल्कि इंटरनल विक्ट्री हासिल करना हो गया है। यही वजह है कि इन दिनों पर्सनेलिटी डवलपमेंट एक्सपर्ट स्प्रिचुअलिटी को भी ध्यान में रख कर युवाओं के व्यक्तित्व को संवार रहे हैं। जिसमें उनका ध्यान युवाओं के बाहरी व्यक्तित्व से ज्यादा उनकी अंतरात्मा या आंतरिक विकास पर होता है। पर्सनेलिटी डवलपमेंट के सेशन में न सिर्फ आध्यात्मिक गुरुओं के लेक्चर का सहारा ले रहे हैं, बल्कि युवाओं को भागवत गीता का पाठ पढ़ाकर जीवन के विभिन्न पहलुओं से उन्हें रूबरू भी करा रहे हैं। कॉम्पिटीशन और स्ट्रेस के इस दौर में स्प्रिचुअलिटी के जरिए अपनी पर्सनेलिटी निखारने में युवा काफी रुचि ले रहे हैं।


इस तरह है चलती हैं कक्षाएं

बिचपुरी में चल रहे एक मैनेजमेंट संस्थान की पीडी काउंसलर हर्षा कुमावत बताती हैं कि पर्सनेलिटी डवलपमेंट में अध्यात्म का रोल होता है। एक सेशन के दौरान बच्चों को स्प्रिचुअल व माइथोलॉजिकल वीडियोज दिखाए थे और उनके व्यूज जाने थे। बच्चों को यह समझाया था कि यह जीवन में कितना अहम स्थान रखता है। जब तक युवा अपने जीवन और उसके उद्देश्य को नहीं समझेंगे, तब तक वे अपना व्यक्तित्व नहीं निखार सकते। साथ ही अगर आप भगवान पर दृढ़ विश्वास करते हैं तो यह विश्वास हर क्षेत्र में काम आता है। इससे कॉन्फिडेंस लेवल दोगुना हो जाता है।

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