27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रोस्टर मिष्ठान कारोबार के फैसले से कारोबारी नाखुश, बोले अब हम नुकसान उठाने की हालत में नहीं

- मिष्ठान कारोबारियों का कहना कि ऐसा होने से सामान खराब होने की समस्या बढ़ेगी। आज डीएम से मुलाकात कर रखेंगे अपनी बात।

less than 1 minute read
Google source verification

आगरा

image

suchita mishra

May 26, 2020

रोस्टर मिष्ठान कारोबार के फैसले से कारोबारी नाखुश, बोले अब हम नुकसान उठाने की हालत में नहीं

रोस्टर मिष्ठान कारोबार के फैसले से कारोबारी नाखुश, बोले अब हम नुकसान उठाने की हालत में नहीं

आगरा. जिला प्रशासन द्वारा बारी बारी से दुकान खोले जाने को लेकर तैयार रोस्टर मिष्ठान कारोबार की व्यवस्था आगरा के मिठाई कारोबारियों को रास नहीं आ रही है। उनका कहना है कि ये व्यवस्था पूरी तरह अव्यवहारिक है। इससे मिठाई कारोबारियों का काफी नुकसान होगा और अब वो नुकसान उठाने की हालत में नहीं है। इसलिए मिठाई की दुकानों को रोज खोले जाने की अनुमति दी जाए। मिष्ठान कारोबारी आज इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी पीएन सिंह के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

बीच-बीच में दुकान बंद रखने से माल होगा खराब

मिष्ठान कारोबारियों का कहना है कि बारी बारी से दुकान खोलकर व्यवसाय चलाना मिष्ठान कारोबारियों के लिए संभव नहीं है क्योंकि पहले दिन कच्चा माल बनता है और दूसरे दिन बिकने के लिए तैयार होता है। उसके बाद दुकानों में बिक्री के लिए सजाया जाता है। बीच बीच में दुकान बंद रखने से माल खराब हो जाएगा। ऐसे में खासतौर पर खोए से बनी मिठाइयां, छैना, दूध आदि का बहुत नुकसान होगा।

मिठाई कारोबार झेल चुका है पांच करोड़ का नुकसान

वहीं मिठाई कारोबारी जय अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन में मिठाई कारोबार पहले ही करीब पांच करोड़ का नुकसान झेल चुका है। अब और नुकसान झेलने की हालत में नहीं हैं। मिठाई की दुकानों का सातों दिन खुलना जरूरी है।

आज डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन

इस मामले में आगरा मिष्ठान विक्रेता संघ के अध्यक्ष देवेन्द्र चौधरी का कहना है कि ये व्यवस्था मिठाई कारोबारियों के पक्ष में नहीं है। इस तरह से मिठाई कारोबार चल ही नहीं सकता क्योंकि कच्चे सौदे को ज्यादा समय तक रखना संभव नहीं है। आज इसको लेकर डीएम से मुलाकात कर अपनी समस्या बताएंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे।

ये भी पढ़ें: महामारी के बीच डायरिया की मार, ज्यादातर दो से दस साल तक के बच्चे हुए बेहाल