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जानिए ताजमहल का पूरा सच

खुद्दामे रोजा कमेटी के अध्यक्ष ताहिरुद्दीन ताहिर ने बताया कि कैसे बना था ताजमहल।

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आगरा

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suchita mishra

Oct 26, 2017

History of Taj Mahal

History of Taj Mahal

आगरा। मोहब्बत की निशानी ताजमहल का नाम पूरे विश्व में है, दूर—दूर से पर्यटक इसकी नायाब इमारत देखने के लिए आते हैं। इसी कड़ी में आज यानी 26 अक्टूबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ताजमहल देखने आए। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने पहली बार आज ताजमहल का दीदार किया। सफेद संगमरमर से बनी इस इमारत की खूबसूरती और तकनीक के किस्से यूं तो आपने खूब सुने होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुगलों के जमाने में इतने उंचे ताज महल को कैसे बनाया गया होगा? आइए हम आपको बताते हैं ताजमहल बनाने की पूरी हकीकत।

पाड़ से चढ़े थे पत्थर
इस बारे में खुद्दामे रोजा कमेटी के अध्यक्ष ताहिरुद्दीन ताहिर बताते हैं कि उस जमाने में क्रेन, लिफ्ट आदि तो होती नहीं थीं, लिहाजा पशुओं की मदद लेकर पाड़ बनाए जाते थे। पाड़ जिसे आम भाषा में हम पुल कहते हैं। ये पाड़ मिट्टी के बने होते थे। इनसे जानवर एक तरफ से पत्थर लेकर चढ़ाई की जाती थी और दूसरी तरफ से उतरते थे। इस तरह काम करके पत्थर और बाकी सामान उपर पहुंचाया जाता था और बाकी काम किया जाता था।

22 सालों में तैयार हुआ और 18 घंटे में खुल गया
ताहिरुद्दीन ताहिर आगे बताते हैं कि जब ताजमहल बनकर तैयार हुआ तो मुगल शासक शाहजहां से इंतजार नहीं हो रहा था। वे चाहते थे कि जल्द से जल्द इसका दीदार करें। उन्होंने कई शिल्पकारों से पूछा कि कितना समय लगेगा इसे जल्दी से जल्दी खोलने में, तो किसी ने छह माह तो किसी ने कम से कम डेढ़ माह बताया। लेकिन शाहजहां इतने दिन इंतजार नहीं करना चाहते थे, लिहाजा उन्होंने नगर में डुग्गी पिटवा दी, कि ताजमहल खुलने जा रहा है, जिसकी जरूरत का जो सामान चाहिए ले जाए। उसके बाद काफी संख्या में नगरवासी सामान लेने के लिए उमड़ पड़े और 18 घंटे के अंदर ताजमहल खुल गया।

पहली ही बार में चमकता निकला ताज महल
ताजमहल जब खोला गया तो पहली बार में ही चमकता हुआ निकला। ऐसा इसलिए कि ताजमहल की उंचाई के मुताबिक पाड़ बनाई जा रही थी। जैसे ही उपर की ओर निर्माण की बात आई तो मखमल के कपड़े में मिट्टी को लपेटकर पाड़ बनाई। उसके अंदर लकड़ी, लोहा, बल्ली, तांबा आदि जो भी मिला, सब लगाया गया ताकि वो गिर न जाए। मखमल के कपड़े के कारण उस पर बिल्कुल धूल नहीं गई। इसलिए खुलते समय एकदम साफ चमकता हुआ ताजमहल सबके सामने आया। उनका कहना है कि शाहजहांनामा, अकबरनामा और द ग्रेट मुगल जैसी किताबों में इन बातों का जिक्र किया गया है।