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श्रमिकों के लिए मसीहा बना ये शख्स, 2100 किमी की पदयात्रा कर श्रमिकों के लिए किया बड़ा काम

100 दिन रोजगार गारंटी योजना का कानून बनवाने के लिए शुरू की थी पहल।

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आगरा

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Dhirendra yadav

Jan 15, 2018

Tula ram sharma

Tula ram sharma

आगरा। यहां उनके बारे में सब सोचते हैं, जो अार्थिक रूप से मजबूत हों। उनकी सुरक्षा, सुविधा, स्वास्थ्य के लिए भी तमाम योजनाएं चलती हैं और उनका ये लोग फायदा भी उठाते हैं, लेकिन एक ऐसा वर्ग भी जिसके बारे में योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उन तक पहुंचती नहीं है। ये वर्ग है श्रमिक वर्ग। हम बात कर रहे हैं 1993 से पहले की। यूपी के श्रमिकों की उन दिनों हालत बेहद खराब थी। फिर उनके जीवन में उजाला भरने के लिए आगरा के पंडित तुलाराम शर्मा ने एक अभियान की शुरुआत की और 2100 किमी की पदयात्रा करने के बाद सफलता भी हासिल की। उनके ही अभियान का असर था, कि वर्ष 2005 में मनमोहन सरकार ने रोजगार गारंटी योजना लागू की।

समझा श्रमिकों का दर्द
ग्राम धनौली के रहने वाले पंडित तुलाराम शर्मा उन दिनों युवा थे और खुद रोजगार की तलाश में भटक रहे थे। उन्होंने नजदीक से श्रमिकों के दर्द को समझा। एक दिन मजदूरी मिली, तो भर पेट खुद खाया और परिवार को खिलाया, लेकिन अगले दिन मजदूरी नहीं मिली, तो भूख पेट सो गए। खुद तो सहन करे लें, लेकिन छोटे छोटे बच्चों को कैसे भूखा सोने दें। इस दर्द से कराह रहे श्रमिकों के लिए आंदोलन की योजना तैयार की।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था वादा
पंडित तुलाराम शर्मा श्रमिकों की इस पीढ़ा को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिले थे। पूर्व प्रधानमंत्री ने युवा श्रमिक नेता की इस पहले की सराहना करते हुए, आश्वासन दिया था। 1986 में राष्ट्रीय ग्रामीण श्रमिक आयोग का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष झीड़ाबाई दारजी को बनाया गया। योजनाएं कईं थी, लेकिन 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु हो गई, जिससे श्रमिकों की आस टूट गई।

1993 में शुरू किया आंदोलन
श्रमिक नेता बने तुलाराम शर्मा ने 1993 में श्रमिकों के लिए ये आंदोलन शुरू किया। 1993 में फतेहपुर सीकरी के ग्राम उंदेरा मोड़ से पहली पदयात्रा शुरू की। शुरुआत में लोगों का सहयोग नहीं मिला, लेकिन तुलाराम शर्मा महज 60 लोगों के साथ इस लड़ाई के लिए निकल पड़े। आगरा में कमिश्नर को ज्ञापन दिया और पैदल ही दिल्ली पहुंचे। यहां पर उन्होंने श्रमिक मंत्री को ज्ञापन दिया। इसके बाद आंदोलन की ये लड़ाई निरंतर चलती रही। दूसरी पथयात्रा 23 मार्च 1995 को शुरू हुई। इस बार एटा सकीट से 250 श्रमिकों का साथ मिला और पंडित तुलाराम शर्मा एटा से दिल्ली तक इनके साथ पैदल पहुंचे। यहां तत्कालीन श्रम मंत्री पीए संगमा को ज्ञापन दिया। उन्होंने आश्वास दिया, लेकिन कार्रवाई कुछ न हो सकी।

दो पदयात्राओं के बाद भी नहीं मानी हार
दो पथयात्राओं के बाद भी श्रमिक नेता तुलाराम शर्मा ने हार नहीं मानी और दो अक्टूबर 2000 को वृंदावन स्थित देवरहा बाबा के आश्रम से आर्शीवाद लेते हुए तीसरी पैदल यात्रा शुरू की। ये यात्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनउ तक की थी। राजधानी में पहुंचकर श्रम मंत्री धर्मपाल सिंह को श्रमिकों की स्थिति को सुधारने के लिए ज्ञापन दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह से अगले दिन जनता दरबार में मिले और इस मामले में चर्चा की। इसके बाद नवंबर 2000 में चौथी पैदल यात्रा बटेश्वर से दिल्ली के लिए शुरू की गई। दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिले और तत्कालीन श्रम मंत्री को ज्ञापन दिया। पांचवी पदयात्रा दिसंबर 2000 में नरोरा घाट से शुय की गई। ये इस अभियान की अंतिम यात्रा रही, जो लखनउ में समाप्त हुई। तुलाराम शर्मा मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्त से मिले और ज्ञापन दिया।

2005 में मिली सफलता
लगातार पत्राचार के माध्यम से श्रमिकों के हक की लड़ाई जारी रही, लेकिन सफलता 2005 में मिली। तुलाराम शर्मा की मांग पर महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005, ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत यूपीए के कार्यकाल में डॉक्टर मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में शुरू की गई। रोजगार गारंटी योजना दुनिया की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। 2 फरवरी 2006 को 200 जिलों में शुरू की गई, जिसे 2007-2008 में अन्य 130 जिलों में फैलाया गया। 1 अप्रैल 2008 तक इसे भारत के सभी 593 जिलों में इसे लागू कर दिया गया।

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