
आगरा।यूपी बोर्ड परीक्ष 2018 के एग्जाम शुरू होने में महज कुछ घंटे शेष रह गए हैं। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण हो गया है और प्रवेश पत्र भी छात्रों पर पहुंच चुके हैं। लेकिन, कुछ परीक्षा केंद्रों के स्वार्थ के चलते करीब दो सौ से अधिक बच्चे इस बार हाईस्कूल और इंटर मीडिएट की परीक्षा देने से वंचित रह जाएंगे। कॉलेजों ने महज कुछ सौ रुपयों के लालच में आकर इन बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया है।
पैसे लेकर भरवाए फॉर्म, नहीं आया प्रवेश पत्र
आगरा में 1,46 हजार से अधिक परीक्षा परीक्षा देंगे। इसके लिए 186 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। वहीं दो दर्जन से अधिक परीक्षा केंद्रों को अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों की सूची में रखा गया है। वहीं आगरा में कुछ कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी खुद मान्यता नहीं है। लेकिन, अन्य कॉलेजों से सेटिंग करने के बाद उन्होंने छात्रों से पैसे लिए और उनका बोर्ड परीक्षा के लिए फॉर्म जमा करा दिया। सूत्रों के मुताबिक कई कॉलेजों ने करीब तीन सौ बच्चों के साथ ऐसा किया है। जब प्रवेश पत्र नहीं पहुंचे, तो बच्चों के अभिभावकों ने कॉलेज संचालकों के दरवाजे खटखटाए। कॉलेज संचालकों ने जब संपर्क किया, और परीक्षा प्रवेश पत्र न आने की बात की, तो उन कॉलेजों ने हाथ खड़े दिए जहां बच्चों के बोर्ड फार्म भरवाए गए थे। अब अभिभावक कॉलेज संचालकों के घर के चक्कर काट रहे हैं और संचालक फरार है। अभिभावकों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन नंबर न होने के चलते वे शिकायत करें, तो किससे करें। अब उनके बच्चों की एक साल बर्बाद हो रही है।
नकल विहीन परीक्षा के लिए बरती जा रही सख्ती
जनपद में बोर्ड परीक्षाएं नकल विहीन कराने के लिए कितनी सख्ती बरती जा रही है, इसकी अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक दर्जन कॉलेजों के मालिकों के फोन नम्बर सर्विलांस पर रखे गए हैं। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक नकल कराने के धंधे पर चोट करने के लिए ऐसा किया गया है। परीक्षा के दिन केंद्रों के कोऑर्डिनटर और अफसरों के मोबाइल फोन को ट्रैकिंग पर रखने की तैयारी है। खासतौर से कॉलेजों के संचालकों पर कड़ी नजर है, जो नकल कराने के लिए चर्चित हैं।
Published on:
05 Feb 2018 03:45 pm
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