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70 हजार परिवारों की रोजी रोटी पर संकट, वित्तमंत्री से की गई ये बड़ी मांग

उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल के सामने नेशनल चैम्बर आॅफ इंडस्ट्रीज एंड काॅमर्स यूपी रखेगा ये मांग।

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आगरा

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Dhirendra yadav

Apr 20, 2018

UP Government

आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल आज आगरा आ रहे हैं। वे यहां सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। उनके आगमन पर आगरा के नेशनल चैम्बर आॅफ इंडस्ट्रीज एंड काॅमर्स यूपी ने अहम मांगें की हैं, जिनसे व्यापार ही नहीं सुधरेगा, बल्कि आगरा के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

ये बोले पदाधिकारी
नेशनल चैम्बर आॅफ इंडस्ट्रीज एंड काॅमर्स यूपी के पदाधिकारियों ने बताया कि विश्व के पर्यटन मानचित्र पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले ताजमहल समेत तीन यूनेस्कों विश्व विरासत इमारतें यहां स्थित होने के कारण आगरा विश्व विरासत शहर होने का प्रबल दावेदार है। आगरा अपनी अनूठी मार्बल पच्चकारी एवं पत्थर के हस्तशिल्प के लिए विश्वविख्यात है, जो कि ऐसी कला है जो मुगलकाल से शिल्पियों के परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी सीखी और सिखाई जाती रही है। इस बारीक कारीगरी को करने में शिल्पियों को काफी कुशलता वं समय की दरकार रहती है और इस कला को इन शिल्पियों के परिवार शताब्दियों से अनौपचारिक रूप ही सीखते आए हैं।

4550 करोड़ डाॅलर का निर्यात
हस्तशिल्प व्यवसाय का कुल निर्यात लगभग 4550 करोड़ डाॅलर है और लगभग इतनी ही आय विदेशी पर्यटकों से काउंटर-सेल के रूप में हो जाती है। परन्तु जीएसटी के आने के बाद से यह हस्तशिल्प उद्योग, जो पूर्व में देश के लगभग सभी राज्यों में वैट और केन्द्रीय उत्पाद कर समेत सभी प्रकार के करों से मुक्त था, अचानक ही 12 प्रतिशत कर की सूची में शामिल कर लिया गया, जो कि जीएसटी के सामान्य ‘फिटमेन्ट’ नियमों के विपरीत है, जिसमें जीएसटी की गणना पूर्व में लागू करों के कुल योग के अनुसार की जानी थी।

आगरा के हस्ताशिल्प उद्योग के सम्बन्ध ये रखे तथ्य -

1. केन्द्र एवं राज्य सरकारों ने समय समय पर हस्तशिल्प उद्योग को करों में छूट देकर स्थानीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा मशीनीकरण के समय में इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रकार की योजनाऐं शुरू की गयी हैं, जो कि भारत के संविधान के सामाजिक न्याय एवं समरूपता के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।

2. जीएसटी लागू होने से पहले हस्तशिल्प पर लागू सभी करों का योग देश के 16 प्रदेशों में शून्य प्रतिशत और 8 प्रदेशों में 4-5 प्रतिशत के बीच था। इसको देखते हुए इस उद्योग पर जीएसटी के अन्तर्गत 12 प्रतिशत का करारोपण जीएसटी के सामान्य ‘फिटमेंट’ नियमों के विपरीत है, जिसमें जीएसटी की गणना पूर्व में लागू करों के कुल योग के अनुसार की जानी थी।

3. यह गलत अवधारणा है कि हस्तशिल्प विलासिता की वस्तु है। दरअसल हस्तशिल्प स्थानीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने का साधन है। यह स्थानीय कला भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग है और अनेक उत्पाद जैसे देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीए आदि हर भारतीय घर का हिस्सा हैं।

4. मार्बल पच्चीकारी एवं पत्थर से तैयार हस्तशिल्प पर 12 प्रतिशत कर आरोपित किए जाने से आगरा के हस्तशिल्प की बिक्री में 50-60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिसका सीधा असर आगरा की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, क्योंकि आगरा की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हस्तशिल्प उद्योग से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।

5. जीएसटी से पूर्व हस्तशिल्प को कर मुक्त रखने का प्रमुख उदेदश्य इन हस्तशिल्पियों को जिसमें पिछड़ी, दलित, अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जनजातियों के लोग शामिल हैं, की कला को प्रोत्साहित व जीवित रखना रहा है।

6. गतमाहों में हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े कई व्यवसायियों ने अपने व्यापार के खर्चो में कटौती करते हुए सीमित किया है, जिसके कारण इस उद्योग में बेरोजगारी की दर भी काफी बढ़ गयी है।

7. स्मरण रहे कि अन्य राज्यों जैसे आसाम, उड़ीसा, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान इत्यादि से भी हस्तशिल्प को कर मुक्त रखने की जीएसटी काउन्सिल से अनुशंसा की गई है।

8. जीएसटी काउंसिल की 25वीं बैठक में हैण्डीक्राफ्ट कमेटी द्वारा 29 प्रकार के हस्तशिल्प को शून्य प्रतिशत किये जाने की सिफारिश को स्वीकार कर लिया था, परन्तु इस सम्बन्ध में कोई अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की गई है।


ये की मांग
इन सभी बिन्दुओं पर गौर करते हुए हस्तशिल्प व्यवसाय के हित में जीएसटी काउंसिल के साथ पैरवी करते हुये जीएसटी की शून्य करारोपण किये जाने की, जीएसटी काउन्सिल को अनुशंसा करने की कृपा करें तथा हैण्डीक्राफ्ट कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अधिसूचना जारी करवा कर अनुग्रहीत करें, ताकि मशीनीकरण के इस दौर में यह लघु उद्योग अपना अस्तित्व बचाए रख सके व इस हस्तशिल्प से जुड़े करीब 70 हजार हस्तशिल्पियों को बेरोजगारी व रोजी-रोटी के संकट से बचाया जा सके।