
UP Gramin Mazdoor Sanghthan
आगरा। पत्थर खदान, ईट भट्टा, निर्माण एवं सन्निर्माण घरेलू कामगर आदि के अलावा असंगठित क्षेत्र कामगारों के सामने आज सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ और सुरक्षा की है। आज भी ये श्रमिक ठेकेदारी प्रथा के जाल में फंसे हुए हैं। सरकार द्वारा कई योजनाएं इन श्रमिकों के लिए चलाई गई हैं, लेकिन उन तक इन सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। आगरा से इन श्रमिकों के लिए 11 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू हुआ है। यदि सरकार ने इन 11 मांगों को पूरा किया, तो यूपी के श्रमिकों की किस्मत बदल जाएगी।
शुरू हुआ आंदोलन
उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के संस्थापक अध्यक्ष तुलाराम शर्मा के नेतृत्व में संचालित प्रदेश स्तरीय अभियान के तहत इस सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में आगरा के अलावा मथुरा, हाथरस , कानपुर देहात, एटा , फिरोजाबाद, अलीगढ़ आदि जिलों के श्रमिक प्रतिनधियों ने भाग लिया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए तुलाराम शर्मा ने पत्थर खदान श्रमिकों को सिलिकोशिस वेल फेयर वोर्ड स्वास्थ केन्द् की स्थापना, ठेकेदारी, प्रथा समाप्त करने, प्रत्येक ग्राम स्तर पर लघु सचिवालय, असंगठित क्षेत्र की कामगार महिलाओं को समान वेतन, शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लेवर कॉलोनियों का निर्माण, लेवर चौक पर श्रमिक सहायता केन्द्र स्थापित करना, भवन एसवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर कराये जायें।
ये हैं 11 मांगे
1. पत्थर खदान श्रमिकों के लिए राजस्थान सरकार की तरह सिलिकोशिस बोर्ड बनाया जाए।
2. ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कम से कम 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाये।
3. प्रत्येक ग्राम स्तर पर लघु सचिवालय बनाये जाएं, जिससे गांव के गरीब श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर योजनाओं का लाभ मिल सके।
4. प्रत्येक लेबर चौक पर मजदूरों के बैठने के लिए स्थाई जगह व श्रमिक सहायता केन्द्र खोले जायें।
5. असंगठित क्षेत्र की श्रमिक महिलाओं को समान कार्य का समान वेतन व अधिकार दिया जाये।
6. बाल श्रमिकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र खोले जायें।
7. घरों, कोठियों, ईंट भट्टा, कृषि में अपने परिवार के साक करने वाले बच्चों पर पाबंदल लगाई जाये।
8. शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिक कॉलोनियों का निर्माण कराया जाए।
9. श्रमिकों के काम करने का समय आठ घंटे निर्धारित किया जाए।
10. जो निर्माण श्रमिक गांवों में या लेबर चौकों से निर्माण कार्य में काम करते हैं, ऐसे श्रमिकों को स्वयं का प्रमाण पत्र मान्य किया जाए।
11. 2 अक्टूबर 1995 से संचालित ग्रामीण बाल श्रमिक विद्यालय को सहयोग किया जए, जिससे श्रमिकों के इन बच्चों को न्याय मिल सके।
Published on:
22 Jan 2018 05:36 pm
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